पंचकूला। हुडा ने 1984 में जमीन एक्वायर की थी तो 10 मरले का प्लॉट देना था। सेक्टर-9 में रहने वाले ब्रह्मदत्त ने इस प्लॉट को पाने के लिए हुडा के साथ 32 साल कानूनी लड़ाई लड़ी। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में जीते। हुडा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी नहीं माने तो वीरवार को एसीजेएम की कोर्ट ने हुडा के इस्टेट अफसर की गाड़ी कुर्क कर दी। इस मामले में अब मंगलवार को सुनवाई है। तब तक गाड़ी कोर्ट के पास ही रहेगी। देखना यह है कि अबकी बार हुडा की तरफ से क्या जवाब दिया जाता है। क्योंकि इससे पहले कई बार गलत एफिडेविट देकर 90 वर्षीय ब्रह्मदत्त को गलत साबित करने की कोशिश की गई है, लेकिन हुडा अफसर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए।
यह थी पॉलिसी
साल 1987में आउस्टी कोटे के लिए पॉलसी को बनाया गया। इसमें कंडीशन थी कि साल 1987 के समय के दौरान एक्वायर की गई जमीन के मालिकों को उसी सेक्टर में प्लॉट दिए जाएं। इसके बाद साल 1998 में पॉलिसी आई कि जिस सेक्टर के लिए जमीन एक्वायर किया गया, अगर उस सेक्टर में जमीन नहीं है तो दूसरे सेक्टर में प्लॉट को दिया जा सकता है, लेकिन हुडा ऐसा करता नहीं है।
हुडा अफसरों ने ऐसे किया गुमराह
ब्रह्मदत्त ने बताया कि साल 2003 में हुडा अफसरों ने दत को ६ मरले प्लॉट के लिए ओस्टी कोटे में एप्लाई करने के लिए कहा, लेकिन उन्हें जनरल में शामिल किया गया और प्लॉट नहीं दिया। साल 2007 में पंचकूला की सेशंस कोर्ट को पता चला कि हुडा ने ऐसा नहीं किया तो झूठा जवाब दिया कि लास्ट डेट के बाद एप्लाई किया गया था। ब्रह्मदत्त ने कोर्ट में स्लिप दिखाते हुए कहा था कि हमने पहले एप्लाई किया और उसके बाद एक्सटेंड डेट भी बढ़ाई थी तो लेट कैसे। इसके बाद कोर्ट ने दत्त के हक में फैसला सुनाया था।
कोर्ट ने बुजुर्ग के हक में सुनाया अपना फैसला
पंचकूला की सेशंस कोर्ट ने जब दत्त के हक में फैसला किया तो उसके बाद पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके लिए एमडीसी सेक्टर 4 में प्लॉट नंबर 254 आई को डिसाइड कर दिया था, लेकिन हुडा ने ऐसा किया ही नहीं। आरटीआई में कहा कि ऐसा किया ही नहीं गया। इसके बाद हुडा ने हाईकोर्ट में डबल बेंच में केस गया तो यहां हुडा अफसरों ने गलत एफिडेविड दिया। बताया गया कि ब्रह्मदत्त 6 मरले का प्लॉट लेने के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने स्टे ऑर्डर कर दिए। ब्रह्मदत्त ने दोबारा कोर्ट में केस लड़ा और सच्चाई बताई। इसके बाद दत्त के हक में फैसला आया।