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पंजाब यूनिवर्सिटी के गार्डन में देखें 190 तरह की गुलदाऊदी

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ एकतरफ जहां इस गार्डन में पहुंचे स्टूडेंट्स अपने मोबाइल में इन खूबसूरत फूलों को कैद करने में लगे थे, वहीं दूसरी तरफ गुनगुनी धूप में बैठे कई स्टूडेंट गुलदाऊदी के फूलों की खुशबू का मजा ले रहे थे। हम बात कर रहे हैं पीयू में चल रहे क्रिसैन्थमम शो की। जहां कई कलर्स और वैरायटी के गुलदाऊदी लगाए गए हैं। हाॅर्टीकल्चर डिपार्टमेंट के डिविजनल इंजीनियर अनिल ठाकुर बताते हैं, \\\"6 साल से क्रिसैन्थमम शो लगाया जा रहा है। पिछले साल 171 गुलदाऊदी की वैरायटी लगाई गई थी। इस साल 190 तरह की गुलदाऊदी यहां देखी जा सकती है। इस शो के लिए गुलदाऊदी की वैरायटी हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना से मंगवाई गई हैं। यह फूल बहुत कम समय के लिए(ज्यादा से ज्यादा 20 या 25 दिन के लिए) खिलता है जबकि इसे उगाने और पूरी तरह से विकसित करने के लिए करीब एक साल की मेहनत लगती है। यह शो 14 दिसंबर तक सुबह 9 बजे से शाम 8 बजे तक चल रहा है।\\\'

flower show

इस बार ये 19 नई वैरायटी: अजीना,रुचिका, पूर्णिमा, अवनीत, कासा, सुन्नार, नानको, शबनम, तरुणी, गामित, अग्निशिका, मिलंद, ताजमहल, ऑलफायर्ड, पोटोमैक,जैसिका, रैक्यूएल, लिंडा और युओट्री।

2900 के करीब लगे हैं गमले

यहां 2900 के करीब गमलों में स्पाइडर, स्नोव्हाइट, इंकवर्ड, कवर्ड, स्पून आदि गुलदाऊदी देख सकते हैं।

गुलदाऊदी की खासियत

हाॅर्टीकल्चर डिपार्टमेंट के डिविजनल इंजीनियर अनिल ठाकुर ने बताया कि गुलदाऊदी के फूलों को जहां डेकोरेशन के लिए यूज किया जाता है वहीं इसकी मेडिसन वैल्यू भी है। अगर पेट खराब हो तो इसके पत्तों को खाने से आराम मिलता है। घर के किसी एरिया में अगर ये लगा दिए जाएं तो इससे एनवायर्नमेंट क्लीन रहता है। पॉल्यूशन कंट्रोल करने में इसका योगदान रहता है। इसके अलावा किसी भी तरह के दर्द पर इसका लेप लगा लिया जाए तो दर्द कम हो जाता है।