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फोटोग्राफी के लिए एस्थेटिक्स की समझ जरूरी
\\\"समकालीनडॉक्युमेंटेशन और आर्ट के संदर्भ में फोटोग्राफी का रेलिवेंस\\\' चर्चा का यही विषय रहा शनिवार शाम मोहाली स्थित जेएलपीएल के साइट ऑफिस में ऑर्गनाइज वर्कशॉप, \\\"लिट्रेसी थ्रू फोटोग्राफी\\\' के दौरान।
इस वर्कशॉप को फोटोग्राफिक सोसायटी ऑफ चंडीगढ़ ने ऑर्गनाइज किया था जबकि बीबीसी डॉक्युमेंट्री फिल्म मेकर दलजीत अमी ने इसे कंडक्ट किया। दलजीत ने कहा कि आज हर किसी के पास कैमरा, मोबाइल फोन, सीसीटीवी कैमरे हैं। ऐसे में फोटोग्राफी ने अच्छे से अपने पंख पसार लिए हैं। इसलिए किसी के पास कुछ एक्सक्लुसिव करने के लिए कुछ बचा ही नहीं। पर मीनिंगफुल फोटोग्राफ्स को पेश करने के लिए फोटोग्राफी के स्किल्स के साथ एस्थेटिक्स की समझ होना भी उतना ही जरूरी है। उन फोटोग्राफ्स को सभी पसंद करते हैं जिनमें कहानी के साथ-साथ विजुअल अपील भी होती है। उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी के एडवांस होने से काफी अच्छे और हाई रेजोल्यूशन कैमरे बाजार में गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले के समय में फोटोग्राफर्स कंटेम्पलेटिव होते थे। फोटो के रोल को बचाना और मौके पर अच्छी फोटोग्राफ क्लिक करना उनके लिए चैलेंज होता था।
टेक्नोलॉजी ने उनके इस काम को तो काफी आसान बना दिया है पर उसके कई नुकसान भी हुए हैं। भले ही पोस्ट प्रोडक्शन में एडोब फोटाेशॉप जैसी टेक्नीक से फोटोग्राफ्स को खूबसूरत बनाया जा सकता है पर ढेर सारे क्लिक्स के चलते फोटोग्राफ्स का डॉक्युमेंटेशन काफी मुश्किल हो गया है। इस मौके पर फोटोग्राफी सोसायटी ऑफ चंडीगढ़ के प्रेजिडेंट डॉ. एसएस भमरा, वाइस प्रेजिडेंट यशिंदर बाहगा, जनरल सेक्रेट्री दीप भाटिया और दूसरे मेंबर्स भी मौजूद थे। इस वर्कशॉप में नेशनल और इंटरनेशनल फेम फोटो आर्टिस्ट रणदीप सिंह के काम पर भी देर तक चर्चा की गई।
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