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राजनीति में इमोशंस की कोई जगह नहीं

7 वर्ष पहले
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एकराजा का बेटा अपने नाम के अनुसार लल्लू होता है। राजा अपने देश में ऐलान करवाता है कि जो भी मेरे बेटे को राजनीति सिखा देगा मैं उसे अपना आधा राज्य दे दूंगा। अगर जिम्मेदारी लेने के बाद वह नहीं सिखा पाया तो मैं उसे मरवा दूंगा। उसी राज्य में रहने वाला एक बूढ़ा व्यक्ति राजकुमार को राजनीति सिखाने की जिम्मेदारी लेता है। वह व्यक्ति राजकुमार लल्लू को पहले पाठ में सिखाता है कि राजनीति के तीन नियम हैं। पहला इसमें रिलेशन के लिए जगह नहीं, दूसरा इमोशन नहीं और तीसरा जो काम सबसे आसान लगता है वही सबसे मुश्किल है। इसके साथ ही वह यह भी बताता है कि इसमें दो देवियां हैं जनता देवी और आजादी। ऐसे ही तीन दोस्त भी हैं धर्म, अर्थ और वर्दी। राजकुमार राजनीति सीख जाता है। फिर कहानी कुछ ऐसे लेती है नया मोड़। राजकुमार उस बूढ़े व्यक्ति को कहता है कि अब गुरुजी आपको मरना पड़ेगा। बूढ़ा आदमी घबरा जाता है अौर राजकुमार को कहता है कि मैंने तुम्हें राजनीति सिखाई और तुम मेरे साथ ऐसा कर रहे हो। राजकुमार बूढ़े व्यक्ति से कहता है कि आपने ही मुझे सिखाया है कि राजनीति में इमोशन और रिलेशन की कोई जगह नहीं। अब आप किसी और को इतनी अच्छी राजनीति ना सिखा सकें, इसी वजह से आपको मरना पड़ेगा। ऐसा कहते ही राजकुमार बूढ़े आदमी को मार देता है। इम्पैक्ट आर्ट्स की ओर से नाटक ‘लल्लू राजकुमार ते तीन रंगी परी’ का मंचन शनिवार को पंजाब कला भवन में हुआ। प्ले को डायरेक्टर बनिंदरजीत सिंह बन्नी ने किया और इसे लिखा पाली भूपिंदर ने।

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