डिवाइडर ऊंचा होता तो एक बच जाता
हाईकोर्ट ने कहा था, फिर भी पटियाला चौक में बदलाव को लेकर कुछ नहीं
फ्लाईओवर्स समेत हाईवेज पर डिवाइडर की कम ऊंचाई भी सड़क हादसों को जानलेवा बना रही है। इन्हें आसानी से लांघ हाईवे पार जाकर बेकाबू वाहन भयावह हादसों का कारण बन रहे हैं। फ्लाइओवर्ज में वाहन को उस पार जाने से रोकने वाले लोहे के क्रैश बैरियर्स या रेलिंग भी नदारद हैं। ट्रैफिक सेफ्टी नियमों की पेचिदगी ऐसी है कि हाईवे पर रफ्तार बढ़ने के साथ इन डिवाइडर्स की ऊंचाई बढ़ने की बजाय कम होने लगती है। इनकी ऊंचाई बढ़ाने क्रैश बैरियर्स और रेलिंग लगाने से केवल फैटल एक्सीडेंट्स में कटौती होगी बल्कि राहगीरों की जानमाल को भी बचाया जा सकता है।
35किमी हाईवे की 20 किमी स्ट्रैच हाईस्पीड, डिवाइडर 125 एमएम: 35किमी लंबे अंबाला चंडीगढ़ हाइवे की करीब 20 किमी स्ट्रैच हाई स्पीड है जहां डिवाइडर्स की ऊंचाई महज 125 एमएम है। शुक्रवार को हुए हादसे का बड़ा कारण हाईवे की अधिकतम रफ्तार, स्ट्रेच माने जाने वाला जीरकपुर फ्लाइओवर और कम ऊंचाई का डिवाइडर था। जिस जगह हादसा हुआ, वहां डिवाइडर महज 175 एमएम यानी करीब 7 इंच ऊंचा है। जहां शहर है और वाहनों की रफ्तार कहीं धीमी होती है, वहां डिवाइडर्स की ऊंचाई अधिक रखी जाती है। यही नहीं, शहरी क्षेत्र में डिवाइडर्स पर लोहे की ग्रिल्स और वाहन को आर-पार जाने से रोकने के लिए लोहे के क्रैश बैरियर्स का भी प्रावधान है। दूसरी ओर, जिस स्पीडी स्ट्रैच पर वाहन सौ से भी अधिक रफ्तार से सरपट दौड़ते हैं, वहां डिवाइडर की ऊंचाई कहीं कम होती है जबकि तेज रफ्तार वाले वाहन को रोकने के लिए ऊंचाई ज्यादा होनी चाहिए।
पजेरो आई20 के बीच रेस लगी हुई थी। पजेरो ने कंट्रोल खो दिया और पोल को टक्कर मारने के बाद दूसरी साइड बाइक, ऑटो आई 20 को टक्कर मारी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई।
दप्पर के नजदीक होंडा सिटी डिवाइडर पार करके दूसरी साइड रॉड में जा घुसी। कार सीधे हरियाणा रोडवेज से जा टकराई। इसमें कार सवार एक महिला समेत चारों लोग मारे गए थे।
इसी हाईवे पर चंडीगढ़ की ओर जा रही आई 20 कार दाईं ओर डिवाइडर पार कर सामने से रही होंडा सिटी कार से जा टकराई। हादसे में नवविवाहित जोड़े समेत चालक को निकालने में एक घंटा लग गया था।
सिर्फ इतनी सी ऊंचाई के हैं फ्लाईओवर पर डिवाइडर।
{ऊंचाई बढ़ाने से कम होंगे फैटल एक्सीडेंट के चांस
{फ्लाईओवर्स के मीडियंस पर रेलिंग, क्रैश बैरियर लगें
{स्पीडी स्ट्रेच पर कम और कम स्पीडी पर ज्यादा ऊंचे डिवाइडर्स
एन-22 पर सिंगपुरा चौक और मेकडोनाल्ड चौक पर ट्रैफिक लाइट्स लगेंगी। इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं। एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर ओसी माथुर ने कहा कि ट्रैफिक सिग्नल लगाने का काम जल्दी हो जाएगा।
जीरकपुर में रफ्तार कम करने के ट्रैफिक पुलिस चाहती है कि शहर में एनएच-22 पर दो जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल लाइट लगाया जाए। सिंगपुरा चाैक और मेकडोनाल्ड चौक। इसके लिए हमने एनएचएआई को लिखा है। इससे क्या होगा कि यहां दो चौराहों पर ट्रैफिक रुककर चलेगा तो आगे भी इसकी रफ्तार कम रहेगी। ट्रैफिक आसानी से निकलेगा भी। ध्यान रहे कि रोजाना एचएच-22 दप्पर टोल प्लाजा पर 30 से 40 हजार गाडिय़ां निकलती हैं।
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