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इम्प्लाॅइज हाउसिंग के लिए जमीन रिजर्व रखकर फंसा प्रशासन

6 वर्ष पहले
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प्रशासन अपने ही झूठ में फंस गया है। प्रशासन अपने इम्प्लाॅइज के साथ साथ हाईकोर्ट से झूठ बोल रहा है। प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड इम्प्लाॅइज को कह रहे हैं कि उनके पास इम्प्लाॅइज हाउसिंग के लिए उनके पास जमीन नहीं है। वास्तविकता में प्रशासन इम्प्लाॅइज हाउसिंग के लिए जमीन अलाॅट कर चुका है लेकिन इम्प्लाॅइज को वह सस्ते में जमीन देना ही नहीं चाहता। हाउसिंग सोसायटी ने हाईकोर्ट में कहा है कि प्रशासन के पास सेक्टर-52 और 56 में इम्प्लाॅइज हाउसिंग के लिए जमीन है। हाईकोर्ट में 9 फरवरी को इस पर सुनवाई है।

इम्प्लॉइज हाउसिंग सोसायटी ने हाईकोर्ट में कहा है कि प्रशासन इम्प्लाॅइज से भी कमाई करना चाहता है। सेक्टर 52 और 56 में जो सेक्टर प्लान लगाया है उसमें इम्प्लाॅइज हाउसिंग के लिए जगह रिजर्व है।

सोसायटी के प्रेसिडेंट बलविंदर सिंह, जनरल सेक्रेटरी डॉ धमेंद्र और कर्मचारी नेता नरेश कोहली के अनुसार वह कोर्ट से इंप्लाइज को ब्याज देनेे की अपील भी करेंगे।

यह है झूठ: पहले लैंड अलॉट कर अब प्रशासन बोल रहा नहीं है जमीन

इम्प्लॉइज हाउसिंग सोसायटी ने कोर्ट से पुराने रेट पर ही जमीन अलाॅट करने की मांग की है। सोसायटी के जनरल सेक्रेटरी डॉ धर्मेंद्र के अनुसार कोर्ट से भी मांग की गई है कि उन्हें उसी रेट पर फ्लैट मिलें जिस रेट पर प्रशासन ने स्कीम लॉन्च की थी। प्रशासन की गलती का खामियाजा वह क्यों भुगतें।

फाइनेंस डिपार्टमेंट इम्प्लाॅइज हाउसिंग के लिए जमीन का फाइनल रेट तक तय नहीं कर पाया है। इस्टेट आॅफिस ने 4 अगस्त, 18 अगस्त और 7 दिसंबर 2010 को फाइनेंस डिपार्टमेंट को लिखा कि हाउसिंग बोर्ड को किस रेट पर जमीन दी जाए लेकिन फाइनेंस डिपार्टमेंट जमीन का फाइनल रेट आज तक तय नहीं कर पाया।

प्रशासन ने इस तरह जमीन अलॉट की।