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चार्जशीट से गायब की गई बूटी राम की डीडीआर, ज्योति के कमरे से लैपटाॅप

7 वर्ष पहले
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लैपटॉप में हो सकते हैं राज

16 दिसंबर 2012 को बूटी की शिकायत पर दर्ज हुई थी डीडीआर

ज्योति की सहेली, पीजी संचालक और बूटी राम के बयानों के मुताबिक ज्योति लैपटॉप यूज करती थी। वह लैपटॉप तो ज्योति की लाश के पास मिले बैग में था और ही पीजी में मिला। आज तक पुलिस ने तो लैपटॉप तलाशा और ही चार्जशीट या पुलिस फाइल में लैपटॉप गायब होने के बारे में रपट दर्ज की।

पंचकूला पुलिस ने कैसे कमजोर किया केस

ज्योति मर्डर केस

भास्कर न्यूज | चंडीगढ़

पंचकूलापुलिसने ज्योति मर्डर केस में कोर्ट में जो चार्जशीट दायर की, उसमें कई अहम पहलू शामिल नहीं किए। इस चार्जशीट में सबसे जरूरी था कि ज्योति ने मरने से पहले 21 नवंबर 2012 को आखिरी बार किससे बात की? जिससे की, उसे क्या बताया था कि वह कहां है? पंचकूला पुलिस के पास असलियत में इन सवालों के जवाब थे और इस संबंध में डीडीआर भी 16 दिसंबर 2012 को पंचकूला के सेक्टर-5 पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। लेकिन चार्जशीट में इस अहम डीडीआर को लगाया ही नहीं गया। इस कारण कोर्ट में पुलिस ऐसे किसी शख्स को सामने नहीं ला सकी, जो बताता कि ज्योति आखिरी बार राम कुमार चौधरी के साथ गई थी।

दरअसल ज्योति के पिता बूटी राम ने 15 दिसंबर 2012 को होशियारपुर से आकर सेक्टर-5 पुलिस स्टेशन में अपने लिखित बयान दिए थे। इसमें बूटी राम ने पहली बार कहा था कि उनकी बेटी के कत्ल में राम कुमार चौधरी का हाथ है। इस पर डीडीआर दर्ज की गई। इस डीडीआर के मुताबिक बूटी राम ने बयान दिया है कि ज्योति ने उन्हें बताया था कि वह राम कुमार चौधरी का इलेक्शन का कामकाज देख रही है और बद्दी जाती है। डीडीआर में लिखा कि 21 नवंबर 2012 की रात करीब 9.15 बजे ज्योति ने आखिरी बार बूटी राम को फोन किया था, बताया था कि वह अपने सर राम कुमार चौधरी के साथ जा रही है। इसके अगले दिन ज्योति की लाश मिली थी। डीडीआर में बूटी राम ने कहा था कि चौधरी का नाम नहीं लेने के लिए उसे 50 लाख रुपए का लालच दिया गया था।