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खुद पर प्रााउड और लड़कियाें पर फख्र महसूस होता है

7 वर्ष पहले
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\\\"मेरेद्वारा डायरेक्ट की गई डॉक्युमेंट्री की स्क्रीनिंग से जो फंड रेज हो रहा है, वह गरीब लड़कियों की पढ़ाई और अन्य मदद में खर्च किया जा रहा है। यह मेरे लिए जहां एक प्राउड की बात है, वहीं इस बात का फख्र भी महसूस होता है कि ऐसे हालात में रहने के बावजूद भी ये लड़कियां पढ़ाई में अच्छा कर रही हैं और जिंदगी में कुछ करना चाहती हैं।\\\' यह कहना है यूआईएलएस पीयू के फोर्थ ईयर के स्टूडेंट राणा गुरतेज का। एक फ्रीलांसर फोटोग्राफर होने के साथ-साथ वह एक इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर भी हैं। राणा ने बताया कि उनकी डॉक्युमेंट्री, ब्रिज ओवर डेस्टिनी-गर्ल्स पॉवर्टी एंड एजुकेशन इन नॉर्थ इंडिया की स्क्रीनिंग यूएस में की जा चुकी है। उसकी स्क्रीनिंग से इकट्ठा हुए फंड्स को 6 गरीब लड़कियों की पढ़ाई पर खर्च किया जा रहा है।

ये 6 लड़कियां कौन हैं और इस डॉक्युमेंट्री का कॉन्सेप्ट उनके दिमाग में कैसे आया, इसके जवाब में गुरतेज ने कहा कि करीब 2 साल पहले उनकी ट्रेवलिंग फोटोग्राफी की एग्जिबीशन शहर में लगी थी। इसे लेकर एक अंग्रेजी न्यूजपेपर में छपे आर्टिकल को पढ़कर यूएस की रिसर्च स्कॉलर इमान ग्रेवाल ने उन्हें संपर्क किया और बताया कि वह कुछ गरीब लड़कियों की केस स्टडी पर रिसर्च कर रही हैं। यह लड़कियां चंडीगढ़ में स्लम एरियाज में रहती हैं। गवर्नमेंट स्कूलों में पढ़ती हैं, गुरतेज ने बताया कि इन लड़कियों के परिवारों के हालात और किन परिस्थितियों में यह पढ़ रही हैं, को देखकर हमने इनमें से 6 को चुना और इनपर यह डॉक्युमेंट्री बना डाली। यह डॉक्युमेंट्री इनकी लाइफ पर फोकस करती है।

उन्होंने बताया कि अब हो सकता है कि इमान के साथ मिलकर वह फिर इन्हीं लड़कियों पर एक और फिल्म बनाएं। इस फिल्म में दिखाया जाएगा कि इस पैसे से की गई मदद से उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आए हैं। गुरतेज ने बताया कि वह स्कूल टाइम से ही फोटोग्राफी कर रहे हैं। इसके अलावा इंटर स्कूल कॉम्पिटीशन में उन्होंने राजस्थान के आर्ट एंड कल्चर पर एक फिल्म बनाई थी, इसे दूसरा इनाम मिला था, लेकिन सोशल इश्यू पर यह उनकी पहली फिल्म थी।

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