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जिस कानून के तहत 500 रु. पेनल्टी लेते हो, क्यों उसी पर स्टे लगा दी जाए: हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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बरींद्र सिंह रावत | चंडीगढ़

शहरमेंरेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी पर लगाई जा रही 500 रुपए प्रति वर्ग फुट की पेनल्टी पर प्रशासन कटघरे में खड़ा हो गया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने प्रशासन से पूछा है कि जिन रूल्स के तहत वह पेनल्टी लगा रहा है, क्यों उन नियमों को ही स्टे कर दिया जाए। हाईकोर्ट ने प्रशासन से यह भी पूछा है कि इस पेनल्टी का आधार क्या है। कोर्ट ने प्रशासन को 9 अक्टूबर के लिए नोटिस जारी किया है।

प्रशासन ने शहर में करीब 7 हजार लोगों को बिल्डिंग मिसयूज वाॅयलेशन की पेनल्टी लगाई हुई है।

पहले की अलॉटमेंट के रूल कैसे चेंज हो सकते हैं

^शहरमें 2009 से पहले की अलाॅटमेंट के लिए रूल चेंज नहीं किए जा सकते। प्रशासन यदि रूल चेंज करता भी है तो इसके लिए अलाॅटीज की कंसेंट जरूरी है। मिसयूज और वाॅयलेशन की पेनल्टी को कोर्ट पहले ही गलत ठहरा चुकी है। -चरंजीव सिंह, प्रेसिडेंट,चंडीगढ़ व्यापार मंडल

अब आगे क्या...

प्रशासनको इस मामले में 9 अक्टूबर को जवाब देना है। प्रशासन के जवाब के बाद हाईकोर्ट तय करेगा कि एक्ट को स्टे किया जाए या नहीं।

एक्ट में सिर्फ 10 रुपए वर्ग फुट पेनल्टी का प्रोविजन

100 से ज्यादा केस|

प्रशासनके इस कदम के खिलाफ विभिन्न अदालतों में 100 से ज्यादा केस चल रहे हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कह चुके हैं कि प्रशासन 500 रुपए प्रति वर्ग फुट की पेनल्टी नहीं ले सकता।

2007 में बनाए अपने नियम और कर दी 500 रुपए पेनल्टी|

प्रशासनने 2007 में चंडीगढ़ इस्टेट रूल्स तैयार किए। इन रूल्स के अनुसार मिसयूज और वॉयलेशन पर पेनल्टी 500 रुपए प्रति वर्ग फुट कर दी। 2009 में इन रूल्स में संशोधन करके इसे पुरानी सभी अलॉटमेंट पर भी लागू कर दिया गया।

कानूनन गलत है पेनल्टी| कानूननप्रशासन यह पेनल्टी लगा ही नहीं सकता। प्रशासन ने शहर में सभी अलॉटमेंट कैपिटल आॅफ पंजाब एक्ट 1952 के तहत की हुई हैं। इस एक्ट के तहत मिसयूज और वॉयलेशन पर सिर्फ 10 रुपए प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पेनल्टी लग सकती है।

अलॉटमेंट कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट-1952| एक्टमें मिसयूज और वॉयलेशन के नाम पर 10 रुपए प्रति महीने प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पेनल्टी का ही प्रावधान है। एक्ट में लिखी किसी भी पेनल्टी में बढ़ोतरी के लिए इसे संसद से पारि