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पुलिस की सेटिंग: महीने के 3 परचे, रिश्वत की रकम और गैरकानूनी धंधे की इजाजत

7 वर्ष पहले
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ऑटो वालों से वसूली का रैकेट दो बार पकड़ चुकी है सीबीआई

इंक्रोचमेंट के लिए दलाल कलेक्ट करते हैं मंथली

सट्‌टा चलता है, दिखावे के लिए दर्ज किए जाते हैं केस

ट्रैपके दौरान एसएचओ राजेश शुक्ला से की गई मारपीट के मामले में मंगलवार को सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर से बुड़ैल चौकी की सीसीटीवी कैमरा रिकार्डिंग अधिकारिक तौर पर हासिल कर ली है। यह रिकॉर्डिंग को स्टडी करके सीबीआई मुख्यालय दिल्ली को रिपोर्ट भेजी जाएगी। राजेश शुक्ला मामले में चाहे सीबीआई का ट्रैप विवादों में हो, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस में मंथली का खेल चल रहा है। शहर में कई थानों में अलग-अलग तरीकों से मंथली इकट्ठी की जा रही है। इसी कारण इंक्रोचमेंट, सट्टा, छोटे होटलों में वेश्यावृत्ति का धंधा चल रहा है। जबकि डीजल ऑटो से पुलिस की मंथली को सीबीआई एक्सपोज कर चुकी है।

पुलिस और कुछ अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए मंथली वसूलने का सबसे बड़ा अड्डा गांवों में चल रहे होटल हैं। इनमें से ज्यादातर बुड़ैल, कजहेड़ी, इंडस्ट्रियल एरिया, पलसोरा और मनीमाजरा में हैं। पुलिस कंट्रोलरूम के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 2 सालों में हर महीने करीब 10 कॉल्स सिर्फ बुड़ैल और कजहेड़ी में वेश्यावृत्ति के संबंध में आती रही हैं। खानापूर्ति के लिए महीने में एक बार पुलिस होटल में रेड करके कुछ लड़कियों को दलाल समेत दबोचकर उन पर आवारागर्दी का केस दर्ज कर लेती है।

मंथली नहीं तो इसकी इजाजत कैसे

ऑटो वालों के साथ पुलिस की मंथली का रैकेट दो महीनों में दो बार ट्रैफिक पुलिस के काॅन्स्टेबल्स को दबोचकर सीबीआई एक्सपोज कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने मंथली लेने का अनोखा तरीका अपना रखा है। इसमें ऑटो वालों के महीने के दो चालान भी वही पुलिसवाला करता है, जिससे ऑटो वाले की सेटिंग होती है। जैसा की जिस ट्रैफिक हवलदार परमजीत को मंथली लेते ट्रैफिक पुलिस ने दबोचा था, उसने दो बार ऑटो वाले का चालान भी काट रखा था।

इंक्रोचमेंट का धंधा पुलिस सेटिंग से चलता है। इसमें दो तरह के दलाल शामिल हैं। एक, जो पुलिस की मंथली कलेक्ट कर रहे हैं और दूसरे जो एमसी के इंक्रोचमेंट दस्ते की। अपना दामन बेदाग रहे, इसके लिए दोनों विभागों ने पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। इसके लिए थाना पुलिस जहां हर महीने अपने एरिया से 5 से 10 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 283 यानी पब्लिक का रास्ता रो