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जहां मानव अधिकार सुरक्षित नहीं, वहां विकास सुरक्षा संभव नहीं: सोलंकी
राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि जहां मानव अधिकार सुरक्षित नहीं, वहां विकास एवं सुरक्षा दोनों ही संभव नहीं हो सकते। प्रो. सोलंकी शनिवार को हरियाणा मानव अधिकार आयोग द्वारा चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में राज्यों के मानव अधिकार आयोगों के महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी के लंबे समय के बाद मानव अधिकार अधिनियम वर्ष 1993 में बना था। इस पर बहुत काम हुआ है। उन्होंने हरियाणा मानव अधिकार आयोग की पहली बार अपनी तरह के बुलाए गए सम्मेलन के प्रयासों की भी सराहना कीे। सम्मेलन में चर्चा से राज्यों के मानव अधिकार आयोग कुछ ठोस सुझाव देंगे, जो देश के लोगों के मानव अधिकारों के संरक्षण में कारगर सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के पास हर वर्ष एक लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त होती है और राज्य मानव अधिकार आयोग के पास भी बड़ी मात्रा में शिकायतें प्राप्त होती हैं जिनके समाधान के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। राज्य के आयोगों को वित्त, योजना, सदस्यों तथा अन्य स्टाफ की नियुक्तियों में स्वायत्ता दी जानी चाहिए।
िसफािरशें लागू करें राज्य सरकारें: बालाकृष्णन
न्यायमूर्तिबालाकृष्णन ने कहा कि राज्यों के मानव अधिकार आयोगों के उचित कार्य संचालन पर वर्ष 2011 में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने न्यायमूर्ति जे पी माथुर की अध्यक्षता में एक 3 सदस्यीय आयोग का गठन किया गया था। जिसने अपनी सिफारिशें दी हैं और ये राज्य सरकारों को लागू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अपने-अपने मानव अधिकार आयोगों को समुचित फंड उपलब्ध करवाए हैं, परन्तु इन्फ्रास्ट्रक्चर अन्य सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। पुलिस को भी मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विजेन्द्र जैन ने कहा कि हरियाणा मानव अधिकार आयोग के गठन के 28 सितंबर को 2 वर्ष पूरे हो रहे हैं और इतने कम अन्तराल में आयोग ने मानव अधिकारों की रक्षा के लिए काफी प्रयास किए हैंे।