मां-बापअनपढ़थे लेक
नवरात्र के नौ दिन। मां को समर्पित व्रत, त्योहार और उत्सव समय। ये समय है अपनी आंतरिक ऊर्जा को जगाने और क्षमताओं को पहचानने का। हम मां शक्ति के नौ रूपों की पूजा करते हैं। देवी की ये शक्तियां आशीर्वाद रूप में हम सबको मिलती हैं। इन नौ दिनों में हम आपको ऐसे लोगों से मिलाएंगे जिन्होंने शक्ति को पहचाना और मिसाल बन गए।
मां-बापअनपढ़थे लेकिन रिश्तेदारों के विरोध पर भी बेटी को पढ़ाया और उसके टीचर बनने का सपना पूरा किया। अब वही बेटी गरीब बच्चों में ना सिर्फ एजुकेशन बल्कि मॅारल वैल्यूज का भी प्रसार कर रही हैं। जीवन की तमाम कठिनाइयों के बीच भी उन्होंने टीचिंग का सफर जारी रखा। इकलौते बेटे की मौत ने उन्हें झकझोरा जरूर लेकिन पढ़ाने का जज्बा बरकरार रहा। ईश्वर हिंदुजा सिर्फ टेक्स्ट बुक का कॉमर्स ही नहीं पढ़ातीं, बल्कि भारतीय जीवन, संस्कार, संस्कृति, त्योहार, देश के शहीदों और इतिहास से भी उन बच्चों को वाकिफ कराती हैं जिनके घरवाले पेट भरने की दौड़ के बीच उनको बमुश्किल ही सही-गलत का अंतर बता पाते हैं।
वर्ष 2000 में करीब 35 रिटायर टीचर्स ने मिल कर एक ग्रुप शुरू किया था। इसके फाउंडर्स में एमसीएम डीएवी कॉलेज में हिंदी की टीचर रहीं जगदम्बा गुप्ता और ईश्वर हिंदुजा भी शामिल थीं। ये ग्रुप गवर्नमेंट स्कूलों में जाता है और प्रिंसिपल की इजाजत लेकर लगातार तीन दिन मॅारल वैल्यूज की एजुकेशन देता है। पहले दिन मॅारल वैल्यूज और भारतीय दर्शन और इतिहास की बात होती है तो दूसरे दिन सभी स्टूडेंट्स से बेनाम पर्चियां मांगी जाती हैं। इन पर्चियों पर बच्चे सेक्स, पेरेंट्स, टीचर्स आदि से रिलेटेड प्रॉब्लम्स लिखते हैं। ईश्वर और उनके साथी प्रिंसिपल, टीचर्स और कई बार एजुकेशन डिपार्टमेंट तक के लेवल पर जाकर इस प्रॉब्लम को सॉल्व करते हैं। कुछ चीजें सबके बीच बिना नाम लिए डिस्कस की जाती हैं। वह वसुदेव कुटुम्बकम संस्था से भी जुड़ी हैं, जो गरीब बच्चों को हर महीने के आखिरी शनिवार को मॉरल वैल्यूज का पाठ पढ़ाती है। संस्था उस महीने में आए बलिदान दिवस का इतिहास बताने के साथ ही हर स्टूडेंट को उसकी निजी जरूरत के लिए एक छोटी सी रकम भी देती है।
मॉरल वैल्यूज की क्लास में ईश्वर हिंदुजा।
जिंदगी के सबक सीखें बच्चे 70साल की उम्र में भी उनकी एजुकेशन के प्रसार की यात्रा निरंतर जारी है। ईश्वर कहती हैं- इसे मरते दम तक जारी रखना चाहती हूं। मकसद है, बच्चों को सिर्फ टेक्स्ट बुक नॉलेज नहीं, बल्कि जिंदगी के सबक सीखने का मौका मिले।
ईश्वर हिंदुजा
मां
के तेज से प्रकाशित हैं दसों दिशाएं: इनकीआठ भुजाएं हैं, इसलिए ये अष्टभुजी देवी के नाम से भी विख्यात हैं। मां के पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व ही नहीं था। इनका निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में है। सूर्