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हिंदी पत्रकारिता के पितामह थे बालकृष्ण शर्मा \"नवीन\'

7 वर्ष पहले
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पंजाबयूनिवर्सिटीके हिंदी विभाग में सोमवार को बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की जयंती पर लेक्चर का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ पत्रकार श्यामाकांत दूबे ने बालकृष्ण शर्मा की रचनाधर्मिता पर प्रकाश डाला। यहां सभी विद्वानों ने सार रूप में कहा कि \\\"नवीन\\\' सही मायने में वाणी के योद्धा एवं हिंदी पत्रकारिता के पितामह थे।

जनतांत्रिक समाजवादी मूल्यों पर अडिग रहकर एक फक्कड़ जीवन अपनाकर उन्होंने समाज के कमजोर गरीबों के हितों के लिए जीवन पर्यन्त संघर्ष िकया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार, प्रो. नीरजा सूद, डॉ. सत्यपाल सहगल, प्रो. बैजनाथ प्रसाद डॉ. गुरमीत सिंह भी उपस्थित रहे। डॉ. सहगल ने विश्वविद्यालयों के हिंदी विभाग तथा संस्थानों में संचालित किए जा रहे पाठ्यक्रमों में बदलाव लाने और बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ के साथ-साथ उनके समकालीन अन्य कवियों पर भी अध्ययन-अध्यापन और शोध कराने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। शोधार्थी अनिल पांडे ने बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की कविता ‘राखी की सुध’ का पाठ किया। बलराम, शर्मीला, राधिका, शकुंतला ने भी बालकृष्ण शर्मा के साहित्य पर आमंत्रित विद्वानों से संवाद स्थापित किया।