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सच्चा प्रेम चाहते हो तो मन के भावों को शुद्ध करना होगा: मुनि
किसीसेसच्चा प्यार चाहते हो तो अपने मन के भावों को शुद्ध करना होगा, क्योंकि आपके भावों से ही आपके व्यक्तित्व की पहचान होती है। सकारात्मक विचार ही काफी नहीं, बल्कि उन विचारों के भाव सकारात्मक होने चाहिए। जब व्यक्ति बाेलता है तो उसके बोलने के भाव से पता लग जाता है कि व्यक्ति सकरात्मक है या नकारात्मक। यदि उसके भाव नकारात्मक होंगे तो उसके अंदर छिपी ऊर्जा का भंडार भी नकारात्मक भावों वाला ही होगा। फिर वह कितना ही अच्छा बोले। सोच-समझ कर बोले, कोई फर्क नहीं पड़ता। केवल जगत को धोखा दे सकता है, पर अपनी अंतर आत्मा को धोखा नहीं दे सकता। ये प्रवचन मुनि विनय कुमार आलोक ने दिए। मुनि ने कहा अब आप अपने जीवन में गौर करें। आपको अपने आस-पास के सभी मनुष्यों के भावों का आसानी से पता चल जाएगा।