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पांचों प्रमुख एजेंसियां करंेगी धान खरीद का बायकॉट
मंडियों में धान की खरीद करने के लिए कर्मचारी रहे तो दिक्कतें सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो मंडियों में ग्लट सकता है और खरीद होने से परेशान किसान आवाजाई रोक सकते हैं। भूपेंद्र सिंह ने कहा, एक अक्टूबर को पांचों एजेंसियों के कर्मचारी चंडीगढ़ के रैली ग्राउंड में रैली करेंगे।
बारिश के कारण बढ़ने वाली नमी से गोदामों और ओपन में रखे अनाज का वजन बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए अनाज को ही गेन कहते हैं। एफसीआई की गेन एडहॉक पाॅलिसी के तहत गोदाम में पड़ी फसल का एक किलो और ओपन में पड़ी फसल का 700 ग्राम गेन एफसीआई काटती है। एफसीआई के काटने पर खरीद एजेंसियों की मैनेजमेंट कर्मचारियों से ये गेन काट लेती है। चूंकि हर साल एक करोड़ टन से ज्यादा गेहूं की खरीद होती है। इससे कर्मचारियों पर रिकवरी डाली गई है।
क्या है गेन
चंडीगढ़ मंे बैठक करते जाॅइंट कमेटी के सदस्य।
एफसीआई समेत छह खरीद एजेंसियां पनसप, पंजाब एग्रो, मार्कफैड, पनग्रेन और वेयरहाउसिंग काॅर्पोरेशन पंजाब की विभिन्न मंडियों से धान खरीदती हैं। एफसीआई का कोटा बीस फीसदी है, लेकिन वह दस फीसदी से ज्यादा खरीद नहीं करती। यानी 90 फीसदी खरीद के लिए स्टेट एजेंसियों पर ही सरकार निर्भर करती है।
भास्कर न्यूज|चंडीगढ़
पैडीमेंनमी की मिकदार 15 से 14 फीसदी करने के राज्य सरकार के फैसले से शैलर मालिक पहले से नाराज हैं। अब पांच प्रमुख खरीद एजेंसियों के कर्मचारियांे ने भी धान खरीद के बायकॉट का एलान किया है। इससे पंजाब में एक अक्टूबर से शुरू होने वाली धान की खरीद प्रभावित होगी।
एजेंसियों के कर्मचारियांे ने कहा है कि पैडी पर गेन के नाम से उन पर करोड़ों रुपए की रिकवरी डाली जा रही है। एक-एक कर्मचारी पर बीस से साठ करोड़ रुपए तक की रिकवरी डाल दी गई है। जिसका वे शुरू से विरोध कर रहे हैं। पांचों खरीद एजेंसियों के कर्मचारियांे की जॉइंट कमेटी के प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा, हम एन मौके पर ये फैसला लेने को मजबूर हैं। दरअसल, एडहॉक पाॅलिसी होने के बावजूद सरकार कर्मचारियों पर करोड़ों रुपए की रिकवरी डाल रही है। इस मसले पर साल 2011 में एक कमेटी बनी। इसमें यह स्पष्ट किया गया था कि गेहूं में किस समय कितना गेन आएगा। यह नहीं कहा जा सकता। इसके बावजूद कर्मचारियों पर करोड़ों रुपए डालना ठीक नहीं है। भूपेंद्र सिंह ने कहा, पांचों एजेंसियों में एक भी फील्ड कर्मचारी नहीं होगा जिस प