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डिलिमिटेशन कमेटी के गठन को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

7 वर्ष पहले
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पंजाबमेंडिलिमिटेशन बोर्ड के मेंबरों को नॉमिनेट करने के फैसले को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जसपाल सिंह की खंडपीठ ने 17 सितंबर के लिए सुनवाई तय करते हुए रोस्टर के मुताबिक बेंच के समक्ष केस लगाए जाने के निर्देश दिए हैं।

कांग्रेस पार्टी के वर्कर राजेश्वर सिंह की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि डिलिमिटेशन बोर्ड के मेंबरों को नॉमिनेट करने के लिए शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नियमों में कांट-छांट की। अपने वर्कर्स और स्थानीय नेताओं को बोर्ड में लाने के लिए सरकार ने हर संभव प्रयास किए। याचिका में कहा गया है कि डिलिमिटेशन बोर्ड के मेंबरों को नॉमिनेट करने में सभी लोकल बॉडीज में सत्ताधारी सरकार के वर्कर्स और नेताओं को शामिल किया गया है। जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के किसी वर्कर अथवा स्थानीय नेता को बोर्ड का हिस्सा नहीं बनाया गया।

याचिका में कहा गया है कि नियमों में संशोधन किए बिना ही दो मेंबरों की बोर्ड में नियुक्ति का प्रावधान कर दिया गया। जबकि पहले एक ही मेंबरों की नियुक्ति की जाती रही है। याचिका में मांग की गई है कि डिलिमिटेशन ऑफ वार्डस ऑफ म्युनिसिपैलिटी रूल्स को खारिज किया जाए। साथ ही पंजाब सरकार के लोकल बॉडीज विभाग की मेंबरों को नोमिनेट करने संबंधी 14 अगस्त के नोटिफिकेशन को खारिज किया जाए।