सर्कस में सुरक्षित हैं औरतें
‘सर्कससे जुड़े 28 साल हो चुके हैं। इसकी अपनी ही एक अलग दुनिया है। यहीं पर मुझे हमसफर मिली और जिंदगी की राह भी। सर्कस की शुरुआत हुई बाइक और जीप स्टंट से। उसके बाद, हाथी मास्टर बना और अब अपनी प|ी सविता के साथ बंदूक से निशाने लगाने का करतब दिखाता हूं।’ ये हैं 42 वर्षीय संजीव एलिक जो आजकल एशियाड सर्कस में अपने करतब दिखाने चंडीगढ़ आए हैं। शनिवार को लगातार बारिश की वजह से सर्कस के शो कैंसिल हुए तो इसी बीच मौका मिला इनसे बात करने का। संजीव ने बताया कि वे बरेली से हैं लेकिन अब उनका परिवार लुधियाना में ही रहता है। सर्कस से कैसे जुड़े? के जवाब में संजीव ने कहा कि एशियाड सर्कस में उनका बड़ा भाई ड्रम बजाता था। भाई की देखा- देखी सर्कस में गया। 12 साल की उम्र में ड्राइविंग का अच्छा एक्सपीरियंस होने की वजह से बाइक स्टंट का काम मिला। बस फिर यहीं का होकर रह गया। सर्कस में रहते हुए सविता से मिला और शादी की, अब हम दोनों साथ में एक्ट करते हैं। सविता ने अपने बारे में बताया कि वह मूल रूप से नेपाल से हैं और 18 साल से सर्कस से जुड़ी हैं। एक्ट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एयर गन के इस्तेमाल से हम दोनों कई तरह के करतब दिखाते हैं। सबसे मुश्किल होता है जब मेरे हाथ में गुब्बारा होता है और संजीव उसे 45 फीट की दूरी से निशाना बनाते हैं। इस बीच एक बार हाथ में चोट भी आई लेकिन सर्कस में एक्ट करना इतना पसंद है कि इसे छोड़ा नहीं।
करतब दिखाते संजीव और कविता एलिक
हफ्ते के हिसाब से मिलते हैं पैसे
जानवरों के एक्ट जान होते हैं
संजीव ने कहा कि जानवरों का एक्ट किसी भी सर्कस की जान होते थे। लेकिन जब से सरकार ने इस पर बैन लगाया है, तब से लोगों ने भी सर्कस से किनारा कर लिया। आज सिर्फ हाथी ही एकमात्र जानवर है, जिसे सर्कस में एक्ट करवाया जा सकता है। जबकि जू से ज्यादा ख्याल जानवरों का सर्कस में रखा जाता था।
आज मौसम के हिसाब से होगी परफॉर्मेंस
एशियाडसर्कस के मैनेजर सुनील गोयल बिल्ला ने कहा कि रविवार को सर्कस के शो मौसम के अनुसार होंगे। इनकी टाइमिंग दोपहर के 1 बजे, 4 बजे और शाम 7 बजे हैं। शो की टिकट का मूल्य 70 रुपए से शुरू होकर 400 तक है।
सर्कस में होने वाली आय के बारे में संजीव ने कहा कि यहां पर हफ्ते के अनुसार ही पेमेंट होती है। एक हफ्ते के 3 हजार रुपए मिलते हैं। एक दिन में दो शो पेड होते हैं