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हमारी पृथ्वी जैसे ग्रह यूनिवर्स में और भी हैं: प्रो. थानू
हमारीपृथ्वीजैसे कई ग्रह इस ब्रह्मांड में हैं। इनकी संख्या कितनी है और कितने समय में हम इन्हें तलाश सकेंगे। ये फिलहाल नहीं बताया जा सकता। अगले कुछ दशक में शायद हम इन्हें ढूंढ सकें। सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ साइंस इन इंडिया (एस पीएसआई) के प्रोग्राम में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स से आए प्रो. थानू पद्मनाभन ने स्टूडेंट्स के साइंस से जुड़े सवालों के जवाब दिए। सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ साइंस इन इंडिया (एस पीएसआई) के प्रोग्राम में कॉस्मिक हिस्ट्री एंड मिस्ट्रीज पर हुए लेक्चर में शहर के कई स्कूली स्टूडेंट्स उनसे रू-ब-रू हुए। प्रोफेसर पद्मनाभन ने स्टूडेंट्स को दुनिया बनने के रहस्यों को तो समझाया ही, साथ ही बिग-बैंग और ब्लैक होल से जुड़े कई सवालों के जवाब भी दिए।
मेरुल
{वो कौन सी एनर्जी है, जिसकी वजह से लाइट डार्क होल में नहीं जा सकती?
-ग्रेविटीके कारण लाइट बेंड हो जाती है, जिसके कारण वह डार्क होल में नहीं जा पाती।
स्टूडेंट्स ने पूछे साइंस से जुड़े कई सवाल...
{मैं साइंसकी पढ़ाई कंटीन्यू नहीं कर पाया, लेकिन एस्ट्रोनॉमी मुझे फैसिनेट करती है, मेरे लिए क्या विकल्प है?
-आजकल इंटरनेट पर हर जानकारी है। इसके साथ ही साइंस की कई मैगजीन्स हैं, जो आपकी क्यूरोसिटी को शांत कर सकती हैं। अगर आप लोकल हैं तो एसपीएस टीआई से भी जुड़ सकते हैं।
{हम कहतेहैं कि बिग बैंग से दुनिया बनी और कहते हैं कि ये सिंगुलर है। हम इसे कैसे एक्सप्लेन कर सकते हैं?
-बिग बैंग या ब्लैक होल की सिंगुलैरिटी का अर्थ ये नहीं है कि इनमें नेचर नहीं है। हमारे एक्सपेरीमेंट कामयाब नहीं हुए इसलिए हम इसे सिंगुलर कह रहे हैं।
{क्या आपआइन्सटीन की रिपल्टेशन इन एनर्जी थ्यूरी को एक्सप्लेन कर सकते हैं?
-इस थ्यूरी पर कई देशों में काम चल रहा है। कुछ साइंटिस्ट इसे स्वीकार करते हैं और कुछ नहीं। इस पर अभी और काम करने की जरूरत है।
{डार्क एनर्जीक्या है, इससे कैसे समझा जा सकता है?
-दुनिया तेजी से एक्सपेंड हो रही हैं। इस एक्सपैंशन के पीछे एक एनर्जी है। ये एनर्जी क्या है, ये अभी पता नहीं लगा इसलिए हम इसे डार्क एनर्जी कहते हैं। इसके कारण ही विश्व का प्रसार हो रहा है।
पद्मनाभन ने एस्ट्रोनॉमी फिजिक्स पर किया काम
प्रोफेसरपद्मनाभन फिलहाल इंटरनेशनल यूनियन प्योर एंड अप्लाइड फिजिक्स के एस्ट्रोनॉमी फि