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ह बात सुनी सुनाई नहीं आखों देखी है। चार पीढ़ी

6 वर्ष पहले
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ह बात सुनी सुनाई नहीं आखों देखी है। चार पीढ़ी के 51 सदस्य एक धागे में पिरोई माला की तरह एकजुट हैं। ये सुबह घर से निकलने से पहले परिवार की हैड परमेश्वरी जोशी के पांव छूते हैं। शाम को घर आकर पूरे दिन की कमाई उनके हाथ में थमाते हैं। ये सब मिलकर छह मंजिले दो घरों मंें रहते हैं। 6 किचन में इनका खाना बनता है। 51 सदस्यांे वाला यह परिवार ट्राईसिटी में संभवत: इकलौता है जहां दादी, सास,बहू, ताऊ, चाचा, बुआ, भांजा, मामा, मामी, पोता, भाई, बहन हर तरह के रिश्ते इस घर में हैं। पंचकूला सेक्टर 8 में ये सब मिलजुलकर रहते हैं। 1977 में बीकानेर से चंडीगढ़ पहुंचे इस परिवार ने यहां “शिव मिष्ठान भंडार’ शुरू किया। जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ा, परिवार भी बढ़ता गया। सब साथ रहना चाहते थे। इसे समझते हुए फैसला किया गया दो घर खरीदने का जिसमें अलग-अलग फ्लोर्स पर सब रहते हैं। परिवार में सबसे बुजुर्ग है परमेश्वरी देवी जोशी, जिनके 6 बेटे और 2 बेटियों का परिवार इस घर में रहता है। 75 साल की उम्र में भी यह अपना सारा काम काज खुद करती हैं। परमेश्वरी परिवार के एकजुट होने की वजह संस्कार मानती है। वे कहती हैं-बीकानेर से पहली बार चंडीगढ़ आए तो कुछ दिन सेक्टर 27 में रहे। 1980 में सेक्टर 26 में शिव स्वीट्स एंड भोजनालय नाम से अपनी पहली दुकान खोली। धीरे-धीरे पूरा परिवार पंचकूला शहर में बसे। 25 साल पहले पंचकूला में अपना घर लिया। तब इस घर में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर ही था। धीरे धीरे हमने घर के ऊपर दो फ्लोर और बनाए और इसी के साथ एक घर छोड़ कर प्लॉट खरीदा और उसमें भी तीन फ्लोर का मकान बनाया। अब ट्राईसिटी में हमारी 4 शॉप्स है। घर में आज भी हर दिन की कमाई को परमेश्वरी देवी के हाथ में रखा जाता है। सुबह जिसे भी जरूरत हो वह परमेश्वरी से पैसे मांग लेता है।

चार पीढ़ियां, 51 फैमिली मेंबर्स

unique family संयुक्तपरिवार की परंपरा को आज भी कायम रखा है पंचकूला की जोशी फैमिली ने।

} बहुत कम मौकों पर पूरा परिवार एक साथ, एक जगह मौजूद हो पाता है। इस तस्वीर में केवल 35 सदस्य ही नजर रहे हैं।

6 किचन, लेकिन खाना जहां मर्जी खाओ

नई पीढ़ी है, अलग-अलग प्रोफेशन में

ये हैं इन सबके नाम

संयुक्त परिवार की तरह घर में एक किचन तो नहीं लेकिन 6 किचन है। इन किचन में रोज अलग तरह के पकवान बनते हैं। कोई कहीं भी जाकर खा सकता है। वैसे अलग किचन होने की एक अच्छी बात है कि हर किचन में 2 सब्जियों के हिसाब से घर में रोज 12 तरह की सब्जियां बन जाती है, जिसमें काफी वैरायटी होती है। खाना पूरी तरह से वेजिटेरियन होता है और इसे सिर्फ घरवाले ही बनाते हैं। नौकर हैं लेकिन सिर्फ बाहरी और ऊपरी कामों के लिए।

साथ रहने के लिए बिजनेस एक्सपेंड नहीं किया

बिजनेसकाफी अच्छा चल रहा है, कई बार यह ख्याल आया की दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी इसे बढ़ाया जाए। लेकिन इसके लिए परिवार से अलग रहना पड़ता, जो किसी को भी मंजूर नहीं था। इसलिए बिजनेस ट्राईसिटी तक ही सीमित रखा।

बदरी नारायण जोशी के परिवार में परमेश्वरी देवी, सीता राम जोशी, राधे श्याम जोशी, घनश्याम जोशी, पुरुषोत्तम जोशी, रामरतन जोशी गजानंद जोशी, संजय, पवन, दीपिका, सुनील, शुभम, नुपुर,कविता, सानवी, सायर , अशोक, मोनू, सुनीता, जयश्री, अविनाश, कुसुम, ओम, सीमा, योगेश, कोमल, सुशीला, ऋतु, बसंत, आरती, हिमांशु, टीना, पूजा, दिव्या, मनीषा, अर्चना, रूद्रप्रताप, अनु, मनोज, प्रीती, महावीर, वैष्णवी, मोहिनी, गायत्री देवी, गंगा देवी, गौरी शंकर, गीत, राकेश, पिंकू, गृतव और रौनक।

फैमिली बिजनेस के अलावा इस परिवार की नई पीढ़ी अलग प्रोफेशन से भी जुड़ी है। इसमें लॉयर, सीए, डॉक्टर और इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशन शामिल हैं। परिवार के दूसरे बड़े बेटे राधे श्याम ने बताया कि आजकल नई पीढ़ी हर तरह के प्रोफेशन को अपना रही है। जिसके लिए कुछ लोग बाहर भी जॉब कर रहे हैं, लेकिन सभी अपने करियर में सेटल होकर यहीं बसना चाहते हैं।