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अब पीयू में नॉन इलेक्टेड डीन की उठ रही डिमांड
पीयूमेंअब डीन ऑफ फैकल्टी की पोस्ट पर सीनियर मोस्ट टीचर को नियुक्त करने की मांग उठने लगी है। इसके लिए पीयू टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) को लेटर्स लिखे हैं। इनमें टीचर ने कहा है कि यूनिवर्सिटी में डीन का इलेक्शन बंद करने की प्रथा शुरू करने के लिए सीनेट में रेसोलुशन लाया जाए। इलेक्टेड डीन संबंधित फैकल्टी में एकेडमिक्स की इम्प्रूवमेंट के लिए कोई काम नहीं कर पाते। पुटा फैकल्टीज और एकेडेमिक काउंसिल में कॉलेज के प्रोफेसर्स को एक्स ऑफिसियो मेंबर्स बनाने का विरोध कर रही है। डीन पद पर सीनियर मोस्ट टीचर की नियुक्ति के लिए प्रो. कृष्ण मोहन ने पुटा प्रेसिडेंट को ईमेल किया है, जिसे प्रो. टंकेश्वर ने सपोर्ट किया।
इसलिएहो रहा विरोध: प्रोफेसर्सके एक्स ऑफिसियो मेंबर्स बनने से डीन के पद पर कॉलेज टीचर्स का कब्जा होगा जो आगे चल कर अपनी मैनेजमेंट के इशारे पर काम करेंगे और एजुकेशन का लेवल नीचे जाएगा। एकेडेमिक्स, सिलेबस और कोर्सेज आदि पर यूनिवर्सिटी का एकाधिकार रहना चाहिए। कॉलेज अपनी कमर्शियल जरूरतों के हिसाब से चलते हैं। यदि वह फैकल्टीज और एकेडमिक काउंसिल का मेंबर बनेंगे तो प्रॉब्लम होगी। कॉलेज के एक टीचर का कहना है कि कॉलेजों के कुल एसोसिएट प्रोफेसर्स में से 10 परसेंट को ही प्रोफेसर बनना है।
डीन फैकल्टी ऑफ डिजाइन एंड फाइन आर्ट्स प्रो. जसपाल कौर कंग हैं। प्रो. कंग पंजाबी साहित्य की माहिर हैं और उनका संबंधित फैकल्टी से कोई संबंध नहीं रहा है। डीन फैकल्टी ऑफ लॉ सालों तक जीके चतरथ रहे हैं और इस बार सत्यपाल जैन।
सभी यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स का सिस्टम रहता है कि डीन सीनियर मोस्ट टीचर होता है। लेकिन पीयू में डीन हर साल इलेक्ट होता है। ये राजनीतिक पद रहता है, जिसका कई बार सब्जेक्ट से कोई लेना-देना भी नहीं होता।
हर सीनेट मेंबर के पास 4 फैकल्टीज होती हैं। एक सीनेटर अपने साथ 1.5 व्यक्ति को फैकल्टी का मेंबर नॉमिनेट करवा सकता है। दो सीनेटर मिल कर 3 मेंबर्स बनाते हैं।