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35 स्कूलों में नहीं संस्कृत के टीचर, 5 स्कूलों में ही कोर्स
नीना शर्मा | चंडीगढ़ neena.sharma@dbcorp.in
केंद्रसरकारने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए द्वितीय संस्कृत आयोग बनाया है, वहीं चंंडीगढ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट संस्कृत को लेकर कोई पहल करता नजर नहीं रहा। शहर के सिर्फ 6 स्कूलों में ही संस्कृत सब्जेक्ट पढ़ाया जा रहा है। 35 गवर्नमेंट स्कूल में ऐसे हैं जहां संस्कृत के टीचर्स की पोस्ट्स ही नहीं हैं, और कई स्कूलों में स्टूडेंट्स को मोटिवेट तक नहीं किया जा रहा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन सीबीएसई के निर्देशों के मुताबिक 11वीं और 12वीं क्लास में हिंदी, पंजाबी और संस्कृत में से एक सब्जेक्ट लेना कम्प्लसरी है। इसके बावजूद स्कूलों में सिर्फ पंजाबी और हिंदी की ऑप्शन दी जा रही है। वहीं एमएचआरडी 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स को संस्कृत पढ़ने पर 250 से 300 की स्कॉलरशिप देती है। गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन के प्रेसिडेंट डॉक्टर विनोद शर्मा ने का कहना है कि एजुकेशन डिपार्टमेंट को जिन स्कूलों में संस्कृत टीचर्स नहीं वहां पर टीचर्स की नियुक्ति करनी चाहिए।
एमएचआरडी ने मांगा ब्यौरा
एमएचआरडीने संस्कृत कमिशन-2014 में संस्कृत के टीचर्स और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स से संस्कृत की स्टडी का ब्यौरा मांगा है। इसमें संस्कृत भाषा को रोजगार के साथ किस तरह से जोड़ा जा सकता है ,और इसका किस तरह से विस्तार के किया जा सकता है।
गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर- 10, 19, 20, 15, 21, 23, 26, 27, 28, 32, 33, 37, 38, 44, 45, 46, 47, 56, एमएचसी मनीमाजरा, जीएमएसएसएस करसान, मलोया, सारांगपुर, मनीमाजरा टाउन, खुडा लाहोरा, धनास, खुडा अलीशेर, कैंबवाला, मौलीजागरा रायपुर खुर्द में संस्कृत टीचर्स ही नहीं है।
येहैं 5 स्कूल |गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-8, 16, 18, 35, 37, 40 में ही संस्कृत विषय पढ़ाया जा रहा है।