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दोनों दलों के दावेदारों का डेवलपमेंट बेदम
राजबीर सिंह राणा | चंडीगढ़ rs_rana@dbcorp.in
शहरकाअगला मेयर कौन होगा यह तो 5 जनवरी को ही पता चलेगा। भाजपा से मेयर के लिए आशा जसवाल की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। कांग्रेस से पूनम शर्मा का नाम चल रहा है। अभी किसी का नाम फाइनल नहीं हुआ है, लेकिन इन दोनों में एक बात कॉमन है। दोनों ही अपने-अपने वार्ड में डेवलपमेंट फंड ही पूरा खर्च नहीं कर पाई हैं।
निगम के हर पार्षद को हर साल वार्ड डेवलपमेंट के लिए 40 लाख रुपए मिलते हैं। आशा जसवाल ने इसमें से 22.22 लाख रुपए ही खर्च किए हैं। वहीं, पूनम शर्मा ने 25.86 लाख रुपए खर्च हैं।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या शहर को ऐसा मेयर मिलेगा जो अपने फंड का ही पूरा इस्तेमाल नहीं कर रहा। मेयर बनने वाले को तो हर साल 2 करोड़ रुपए मिलते हैं डेवलपमेंट पर खर्च करने के लिए। लेकिन जो पार्षद 40 लाख रुपए का विकास नहीं करा पा रहे, वो 2 करोड़ का क्या कराएंगे?
मिले 10.40 करोड़, खर्च हुए 8.40 करोड़
राणा कश्मीरी देवी 9.76 लाख
देश राज गुप्ता 16.02 लाख
मुकेश बस्सी 16.77 लाख
जन्नत उल जहां 19.13 लाख
आशा जसवाल 22.22 लाख
देवेश मोदगिल 43.99 लाख
दिवंगत मलकीयत सिंह 43.69
हरफूल चंद्र कल्याण 43.43 लाख
गुरबख्श रावत 43.37 लाख
सतिंद्र सिंह 42.11 लाख
मलोया की राजपूत धर्मशाला की रेनोवेशन पर 15 लाख खर्च होने हैं। -पूनम
12.60 लाख से सेक्टर 23, 24, 36 के पार्कों में झूल लगने हैं। 8 लाख से लाइटें। -आशा
पांच पार्षद ऐसे हैं, जिन्होंने विकास कार्यों पर तय फंड से ज्यादा खर्च किया है। हालांकि इसे अगले साल के फंड में एडजस्ट किया जाएगा। वहीं, चार पार्षदों ने तो 20 लाख रुपए से भी कम डेवलपमेंट कार्यों पर खर्च किए हैं।
निगम के हर पार्षद को हर साल वार्ड डेवलपमेंट के लिए 40 लाख रुपए मिलते हैं। इस हिसाब से 26 वार्डों में डेवलपमेंट फंड से 10 करोड़ 40 लाख रुपए खर्च होने चाहिए थे। सवा 11 महीने में पार्षदों ने 8.40 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं।
काम कराने में मुकाबला बराबरी का
नतीजा 26 दिन बाद
मेयर