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कान से पकड़े जाएंगे क्रिमिनेल क्योंकि हर कान की बनावट है अलग-अलग
कान की बनावट से ही पहचाना गया था नाजी वॉर क्रिमिनल एडोल्फ आइकमैन
फिंगरप्रिंट्स और फुट प्रिंट्स की तरह की ही ईयर प्रिंट्स भी पुलिस इन्वेस्टीगेशन में काफी कारगर साबित होते हैं। शरीर के कई हिस्सों की तरह कानों की बनावट भी अलग होती है और इससे कई आपराधिक वारदातों को सुलझाया जा सकता है। पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. केवल कृष्ण की एक रिसर्च में ये तथ्य सामने आए हैं। डॉ. कृष्ण की इस रिसर्च को अमेरिकन एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज ने एकसेप्ट कर लिया है। डॉ. कृष्ण अपनी इस रिसर्च को अब 16 से 21 फरवरी तक अमेरिकन एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज की 67वीं एनुअल साइंटिफिक मीटिंग में पेश करेंगे। ये मीटिंग ओरलैंडो, फ्लोरिडा, यूएसए में होगी। इस मीटिंग में दुनिया भर से 5500 से ज्यादा साइंटिस्ट भाग लेंगे।
दुनियाभरमें 95 केस हुए सॉल्व: डॉ.कृष्ण ने बताया कि विश्व के कई देशों में पुलिस और फॉरेंसिक इन्वेस्टीगेशन में ईयरप्रिंट्स का इस्तेमाल हो रहा है। दुनियाभर में अब तक 95 केस ईयरप्रिंट्स से सॉल्व किए जा चुके हैं। इनमें ज्यादातर केस ऐसे थे जिसमें अपराधी के ईयरप्रिंट्स दीवारों, अल्मारी या अन्य जगहों से लिए गए हों। इंडिया में अभी तक इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है। डॉ. कृष्ण ईयरप्रिंट्स तकनीक पर भी रिसर्च कर रहे हैं।
डॉ. कृष्ण ने बताया कि उन्होंने कानों की बनावट पर अध्ययन के लिए 177 लोगों पर रिसर्च की। इनमें 90 पुरुष और 87 महिलाएं थीं। रिसर्च में देखा गया कि इन सभी लोगों के कानों की बनावट अलग-अलग थी।
फोरेंसिक फाइल्स के फोटो जिनमें उनके कानों का स्केच बनाकर उनकी फोटो में कान के डिजाइन से मिलाया गया।
डॉ. कृष्ण ने बताया कि आपराधिक मामलों में कई बार सीसीटीवी फुटेज में चेहरा नहीं दिखता जबकि कान साफ नजर आते हैं। ऐसे में संदिग्ध लोगों को पकड़ कर उनके कानों की बनावट से अपराधी का पता लगाया जा सकता है। इसी तरह मास कैजुअल्टी में कानों से पीड़ितों की पहचान में भी मदद मिल सकती है।
{हिटलर के आदेशों का पालन करते हुए 60 लाख नाजियों को मौत के घाट उतारने वाले वॉर क्रिमिनल एडोल्फ आइकमैन की पहचान उसके कान की बनावट से ही हुई थी। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद वो अर्जेंटीना में रिकार्डो क्लीमेंट बनकर रह रहा था।
{1960 में इजरायल की डिटेक्टिव एजेंसी मोसाद ने आइकमैन को अर्जेंटीना में उसके घर के पास से पकड़ा था। 1962 में उसे मौत के हवाले कर दिया गया था।
{2012 में तेल अवीव में लगी एक एग्जिबिशन में मोसाद ने पहली बार खुलासा किया था कि आइकमैन को कैसे पकड़ा गया। इस एग्जिबिशन में वो ईयर (कान) फाइल भी मौजूद थी, जिसके आधार पर आइकमैन की पहचान हुई थी।
{आइकमैन और क्लीमेंट की कुछ फोटोग्राफ्स को मिलाया गया। खासकर उसके कानों को। फिंगरप्रिंट की तरह ही हर इंसान के आउटर ईयर अलग होते हैं। कान के फोटोग्राफ्स का मिलान किया गया तो 10 पॉइंट्स बिल्कुल एक जैसे मिले और कहीं भी कोई फर्क नहीं मिला।
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