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एनिमल वेलफेयर में 30 साल से जुटी एनजीओ को बंद करने की तैयारी
एनिमलवेलफेयरके लिए काम कर रही शहर की सबसे पुरानी एनजीओ सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रयूलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) को प्रशासन बंद करने की तैयारी में है। फंड में गड़बड़ियों और जानवरों के साथ हो रहे अत्याचार के चलते प्रशासन ने एसपीसीए को शो कॉज नोटिस जारी किया है। 30 जनवरी को नोटिस जारी कर 12 फरवरी तक जवाब मांगा गया है। जवाब नहीं आने पर प्रशासन एसपीसीए काे टेकओवर करेगा और उनकी लैंड लीज भी कैंसिल कर दी जाएगी। प्रशासन ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किया है। बता दें कि सितंबर में बोर्ड की अधिकारी प्रोमो रेबेलो ने एनजीओ के सेक्टर-38 स्थित हॉस्पिटल का दौरा किया था। यहां कई गड़बड़ियां मिली थीं।
^प्रशासन की ओर से जो नोटिस भेजा गया है, उसमें सभी आरोप झूठे हैं। नोटिस भी आधा-अधूरा ही भेजा गया है जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है। हम इस नोटिस का जवाब भी देंगे और जरूरत पड़ी तो कोर्ट में भी जाएंगे। -जसबीररलहन, प्रेसीडेंट,एसपीसीए
एसपीसीए को यूटी प्रशासन से हर साल 30 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। हर तीन-चार महीने में ग्रांट का कुछ हिस्सा एनजीओ को मिलता रहा है। लेकिन पिछले साल सितंबर से प्रशासन ने उनकी ग्रांट भी रोक रखी है।
प्रशासन ने एसपीसीए को एनिमल वेलफेयर के लिए 38वेस्ट में 2 कनाल लैंड 60 हजार रुपए लीज मनी पर दी थी। इसमें से 25 फीसदी यानी 15 हजार रुपए कंसेशन भी दिया।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने एसपीसीए को 10 लाख रुपए जानवरों के लिए शेल्टर हाउस बनाने के लिए दिए थे। ये 10 लाख रुपए दो इंस्टॉलमेंट में दिए गए थे। पहली इंस्टॉलमेंट 2003-04 में 5 लाख अौर 5 लाख रुपए 2006-7 में दिए गए। लेकिन शेल्टर हाउस बनाया और पैसे का हिसाब दिया।
{एसपीसीए के शेल्टर की हालत बदतर
{जानवरों के साथ बुरा बर्ताव
{एंबुलेंस के फ्यूल की चोरी, मिसयूज
{जानवरों के इलाज में कोताही बरतना, जिम्मेदारी निभाना
{चारे और कैश का कोई रिकॉर्ड नहीं
{मिल रही ग्रांट का कोई हिसाब नहीं
{प्रशासन ने भेजा नोटिस, 12 तक मांगा जवाब