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19 साल, 400 पेशियां, फिर भी नहीं हारीं मधु प्रकाश

7 वर्ष पहले
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19सालतक लंबी लड़ाई चली, 400 पेशियां हुईं। फिर भी हार मानते हुए मधु प्रकाश ने एक रसूखदार को उसके किए की सजा दिलाकर रही। यह महिला की शक्ति ही है। जी हां, मधु प्रकाश उन आनंद प्रकाश की असल शक्ति हैं जिन्होंने बेटी आराधना की फ्रेंड रुचिका गिरहोत्रा को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले एक रसूखदार के खिलाफ 19 साल लड़ाई लड़ी। मधु ही थीं जिन्होंने पति काे चेताया कि सब कुछ जानते हुए भी खामोश रहे तो कल यही उनकी बेटी के साथ भी हो सकता है। मधु प्रकाश बताती हैं कि रुचिका बेशक हमारी बेटी नहीं थी। लेकिन जब रुचिका ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर द्वारा उसके साथ छेड़छाड़ करने की आपबीती सुनाई तो उन्हें बड़ा गुस्सा आया। तय कर लिया कि ऐसे लोगों को अगर यूं ही छोड़ दिया गया तो कल किसी और की बेटी के साथ ऐसा होगा। इसके बाद मधु ने अपने पति आनंद प्रकाश को इस बारे में बताया। दोनों ने ठाना कि ऐसे लोगों को कटघरे में खड़ा कर सजा दिलाएंगे। मधु और आनंद प्रकाश ने 19 साल इस केस में कानूनी लड़ाई लड़ी।

मधु बताती हैं कि हमारे देश में कानूनी प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। इसलिए केस अंबाला, पटियाला और चंडीगढ़ में ट्रांसफर होता रहा। इस दौरान करीब 400 पेशियों पर मधु अपने पति आनंद प्रकाश के साथ गईं। बेटी सिडनी में सेटल हो गई थी, उसे भी कई बार यहां आना पड़ा। केस हाइप्रोफाइल था, इसलिए उन्हें धमकियां भी मिलीं। लेकिन हम न्याय की अपनी जिद पर अटल थे। यही नहीं उस वक्त आनंद प्रकाश हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में चीफ इंजीनियर थे, उन्हें डिमोट करवा एसई लगवा दिया गया। उनके खिलाफ 9 झूठी चार्जशीट करवाई गईं। वहीं रुचिका के भाई आशु गिरहोत्रा के खिलाफ भी झूठे मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर किया, वह कई महीने बेड पर ही रहा। 21 दिसंबर 2009 को जब चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से सजा हुई तब हमें जो खुशी मिली। यह सब दृढ़ इच्छा शक्ति का नतीजा था।

मधु प्रकाश

डरने और हारने का जज्बा

मधुप्रकाश कहती हैं कि अगर आप के अंदर कुछ करने का जज्बा है तो वह जरूर मिलता है। अगर कहीं गलत हुआ है या हो रहा है तो उसके खिलाफ आवाज उठाएं। कभी डरें। क्योंकि डरेंेगे तो वो जिन्होंने बुरे काम किए हैं।