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हीमोफीलिया पेशेंट्स के इलाज पर प्रशासन से जवाब तलब
देशमेंकई राज्यों ने हीमोफीलिया रोगियों के उपचार के लिए पाॅलिसी बनाई है और उनको निशुल्क इलाज की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा इस बारे में कोई पालिसी क्यों नहीं बनाई गई। कार्यवाहक चीफ जस्टिस आशुतोष मोहंता जस्टिस राज राहुल गर्ग की खंडपीठ ने बुधवार को चंडीगढ़ प्रशासन को 16 जनवरी के लिए नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है।
चंडीगढ़ की हीमोफीलिया सोसायटी की ओर से जनहित याचिका दायर कर कहा गया कि दिल्ली, बिहार सहित ज्यादातर राज्यों में हीमोफीलिया बीमारी से लड़ने के लिए वहां की राज्य सरकारों ने सभी मुख्य अस्पतालों में हीमोफीलिया दवाओं का स्टॉक जमा किया है। हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसके चलते शरीर से खून का बहाव रुकता नहीं है। इस बीमारी से ग्रसित रोगियों को चोट लगने पर खून का बहाव रुकता नहीं है। इस बीमारी के दो चरण होते हैं। पहले में खून का बहाव देरी से रुकता है और दूसरे में रुकता ही नहीं है। बीमारी से पीड़ित रोगियों के शरीर में अंदरूनी खून का बहाव भी होने लगता है जिससे रोगी की जान को गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। देश में इस बीमारी से एक लाख लोग पीड़ित हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के पास ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है जिससे हीमोफीलिया के रोगियों को निशुल्क और बेहतर इलाज मुहैया करवाया जा सके। याची संस्था ने मांग की कि प्रशासन को निर्देश दिए जाएं कि इस प्रकार के मामलों से निपटने के लिए स्पेशल पालिसी बनाई जाए, जिससे इस रोग से पीडि़त रोगियों को राहत दी जा सके। हाईकोर्ट ने इस पर चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब करते हुए पूछा कि हीमोफीलिया रोग के उपचार के लिए शहर में क्या सुविधाएं हैं।