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सभी के लिए मिसाल बने सिद्धार्थ

7 वर्ष पहले
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सभी की मेहनत से सफल रहा प्रोग्राम

\\\"रीढ़ की हड्‌डी\\\' में बताए लड़कियों के अधिकार

एनुअलहाउस शो के दौरान सेेंट जॉन्स स्टूडेंट्स ने हिंदी स्किट \\\"रीढ़ की हड्‌डी\\\' पेश की। इस लड़कियों की पढ़ाई और अिधकाराें का साेसायटी में महत्व बताया गया। इस परफॉर्मेंस को सभी ने सराहा। स्टूडेंट्स ने दिखाया कि लड़का चाहे कितना भी पढ़ा लिखा हो लेकिन लड़की उसे बीए पास नहीं बल्कि 10वीं पास ही चाहिए। लड़का चाहे लड़कियों को छेड़ता हो लेकिन लड़के के घरवालों को ऐसी बहू नहीं चाहिए जो अपने हक के लिए आवाज उठा सके। स्टूडेंट्स ने संदेश दिया कि जब तक दहेज की प्रथा खत्म नहीं होगी, लड़कियों पर अत्याचार बंद नहीं होगा और लड़कियों को भी जब तक लड़कों के बराबर पढ़ने लिखने का मौका नहीं मिलेगा तब तक समाज की रीड की हड्डी टूटी ही रहेगी।

सिद्धार्थ

लड़कियों को पढ़ाएं, तभी बंद होंगे अत्याचार

स्कूल प्रिंसिपल कविता दास ने कहा कि स्टूडेंट्स ने चारों दिन काफी अच्छाई परफॉर्मेंस दी। ये सभी टीचर्स और स्टूडेंट्स की मेहनत का ही फल है। स्टूडेंट्स ने चारों दिन मोटिवेशनल स्किट अौर प्ले पेश किए। आज हमें दूसरों को नहीं बल्कि खुद को बदलना होगा।

चंडीगढ़| सेंटजॉन्स स्कूल में खत्म हुए चार दिवसीय एनुअल शो की थीम \\\"ऑनर\\\' रही। स्कूल में 10वीं क्लास के स्टूडेंट सिद्दार्थ ने भी ऐसा ही काम किया कि वह दूसरे स्टूडेंट्स के लिए एक मिसाल बन गया है और स्कूल को उस पर पर गर्व है। सिद्दार्थ ने स्कूल में सेग्रीगेशन ऑफ वेस्ट एंड रीसाइकिलिंग मूवमेंट चलाई जिस अब पूरा स्कूल फॉलो करता है। सिद्दार्थ ने कहा कि पहले स्कूल का वेस्ट मैटीरियल एक ही \\\"बिन\\\' में इकट्ठा होता था। इस पर सिद्दार्थ ने स्कूल में इस मूवमेंट को शुरू किया। स्कूल में विभिन्न जगहों पर चार कलर्स के \\\"बिन\\\' रखे गए, जिसमें की अलग अलग वेस्ट मैटीरियल फैंका जाता है।

ट्रैफिकप्रॉब्लम को भी सुलझाया: सिद्दार्थने सेंट जॉन्स से हैदराबाद के एक प्राइवेट स्कूल में थे। वहां पार्किंग की प्रॉब्लम ज्यादा था। डिजाइन फॉर चेंज नामक ऑर्गेनाइजेशन के एक कॉन्टेस्ट में उन्होंने पार्टिसिपेट किया। उन्होंने स्कूल में छुट्टी के समय होने वाली ट्रैफिक की प्रॉब्लम काे सुलझाने का लक्ष्य लिया। स्कूल के स्टूडेंट्स को इस कॉज के लिए इकट्ठा किया और एक हफ्ते में इसे सुलझा दिया। इस नेशनल लेवल कंपीटिशन में स्कूल का नाम रोशन किया।