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70%मरीजों में पता ही नही चलता फेफड़े का कैंसर

7 वर्ष पहले
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फेफड़ोंकेकैंसर के 70 प्रतिशत मरीजों को शुरू में पता ही नही चलता कि वो कैंसर की प्रारंभिक स्टेज में पहुंच चुके हैं, क्योंकि ऐसे केस में समझ लिया जाता है कि मरीज की छाती में टीवी की पहचान के तौर पर होती है। इसी तरह मलाशय के कैंसर के करीब 50 फीसदी केस में शुरुआती दौर में गलती से पाइल्स का इलाज शुरू कर दिया जाता है। ऐसे मरीजों की सही बीमारी का पता चलने से कैंसर बढ़कर गंभीर स्टेज में पहुंच जाता है। इसलिए जरूरी है कि कैंसर की बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए पहली स्टेज पर ही पहचाना जा सके। ये बात मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल की ओर से सेक्टर-35 में हुई सीमएई में डॉ. डॉ सुनंदन ने कही। इस सीएमई में मेडिकल एंड हेमटो ऑनकोलॉजी के कंसलटेंट डॉ. सचिन गुप्ता ने रोल ऑफ टारगेटेड थैरेपी इन ऑनकोलॉजी विषय पर बात की। उन्होंने बताया कि इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री और लोसिटोमेट्री और साइटोजेनेटिक्स जैसी तकनीक से कैंसर को ढूंढ़ने के साथ ही इस बीमारी के इलाज में भी मदद कर रही है। कैंसर के इलाज के लिए आई नई दवाएं और इलाज की तकनीक अब हर तरह के साइड इफेक्ट खत्म करने में मदद कर रहे हैं। नई तकनीक से इलाज भी जल्दी संभव हुआ है। इस सीएमई में कई तरह के कैंसर के लक्षण और बचाव के तरीकों पर बात हुई। यहां पर दूसरे हॉस्पिटल के डॉक्टर भी शामिल हुए।

सीएमई में मेडिकल ओन्कोलॉजी के डॉ.गौतम गोयल ने कहा कि कैंसर के मरीजों का सही डायग्नोसिस और इलाज शुरू करने से पहले इस बीमारी का लेवल जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि कैंसर का लेवल पता करने के बाद मरीजों का इलाज ज्यादा कारगर तरीके से संभव है। गायनी ओंकोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा कि ब्रेस्ट और सरवाइस कैंसर की स्क्रीनिंग और डायग्नोस की नई तकनीक की जानकारी दी।

एमआ मैक्स के ही डॉ. डॉ.पंकज अरोड़ा ने बताया कि फेफड़े, ब्रेस्ट के साथ नैक कैंसर, प्रोस्टेट, कोलोन, पेट, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर बहुत कॉमन है। उन्होंने बताया कि तंबाकू के इस्तेमाल की वजह से देश में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। उन्होंने सलाह दी कि ऐसे उत्पादों की बिक्री पर बैन नही हो कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। इसलिए जरूरी है कि पहले कैंसर का लेवल चेक कर लिया जाए, ताकि इस रोग काे पकड़ने में मदद मिल सके।

तंबाकू के इस्तेमाल से बढ़ रहे हैं कैंसर