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नासकॉम: 10 हजार स्टार्ट अप देने का टारगेट

6 वर्ष पहले
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50 हजार से शुरू किया बिजनेस, आज 100 करोड़ है टर्नओवर

ननु जोगिंदर सिंह | चंडीगढ़ nj.sinch@dbcorp.in

गवर्नमेंट इम्प्लॉयी पिता और टीचर मां के बेटे को यूनिवर्सिटी के बीएमएस ब्लॉक से निकलते ही मिली 3800 की नौकरी कम नहीं थी। उस समय तो यूजीसी भी 3200 रुपए ही स्कॉलरशिप देती थी। लेकिन सपना मर्सिडीज और रोल्स राय लेने का था। नौकरी में सिक्योरिटी थी, आराम था लेकिन बिजनेस में सभी सपने पूरे होते और भरपूर पैसा भी मिलता। इसलिए बिजनेस को चुना और शुरुआती दौर में अपने विजिटिंग कार्ड पर अपनी ही कंपनी का सेल्स मैनेजर बन कर लोगों से मिलता। ताकि कंपनी का इंप्रेशन बने। पीयू के उद्यमी-2015 मंे पहुंचे टायनॉर के ओनर पुष्विन्दर सिंह ने ये बातें शेयर कीं। एबडॉमन, बैक आदि के लिए बेल्ट बनाने वाली ये कंपनी दुनिया के 30 देशों में सामान भेजती है। सिर्फ 50 हजार रुपए से अपने बिजनेस की शुरुआत करने वाले पुष्विन्दर की कंपनी का टर्न ओवर 100 करोड़ रुपए सालाना है, जबकि 600 करोड़ मार्केट वैल्यू है।

पुष्विंदर सिंह ने बताया कि पेरेंट्स से बिजनेस के लिए कहा तो उनका कहना था कि हमारी जॉब है तब तक सैटल हो जाआे। फिर क्या था पहले दवाओं की मार्केटिंग शुरू की और साथ ही ऑर्थोपेडिक एप्लाइंसेज की मेन्युफैक्चरिंग। लोन लौटाने पर मिले एप्रिसिएशन लेटर से मोहाली में इंडस्ट्री के लिए प्लाॅट और आसानी से लोन मिले।

पुष्विन्दर सिंह

अनिरुद्ध बालाकृष्णन

चंडीगढ़ | नासकॉमने 10 साल में इंडस्ट्री को 10 हजार स्टार्ट अप देने का टारगेट रखा है। अब तक देश भर से आई 9000 एप्लीकेशंस में से 800 को फाइनल करके उनके स्टार्ट अप और मेंटरिंग की शुरुआत कर दी गई है। ये जानकारी दी 10,000 स्टार्ट अप प्रोग्राम को हेड कर रहे नासकॉम के सीनियर मैनेजर अनिरुद्ध बालाकृष्णन ने। इस नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन का मकसद आईटी इंडस्ट्री को मजबूत करना है। बालाकृष्णन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के इंटरप्रिन्योर डेवलपमेंट सेल (ईडीसी) की ओर से कराई जा रही समिट उद्यमी-2015 के आखिरी दिन पार्टिसिपेट करने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि फंडिंग, एक्सलरेशन, मेंटरिंग और इंटरप्राइज स्टार्ट अप स्कीम उपलब्ध कराई जा रही है। सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर में जो आइडियाज स्टार्ट अप ला रहे हैं, वह बहुत ही इनोवेटिव हैं। कई तो प्रोडक्ट ही बना चुके हैं। एग्रीकल्चरल, सैस प्रोडक्ट, लेटीट्यूड एरियाज के आइडियाज भी हैरान करने वाले हैं।

नासकॉम अगले पड़ाव में अब फ्रेशर्स को ऐसी मदद देगा, जिसमें वे अपने आइडिया को मौके पर ही प्रेजेंट कर सकेंगे। अलग-अलग शहरों में मौजूद वेयर हाउसेस को एक्सीलेंस सेंटर्स में बदला जा रहा है। ये सभी आपस में कनेक्टेड होंगे। इसमें लैब होंगी और स्टार्ट अप्स को गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपनी डिवाइसेज देंगी। इन डिवाइसेस पर अपना आइडिया प्रोटोटाइप करके, इलस्ट्रेटर करना होगा। वहीं पर रिफाइन करते-करते वह अपने आइडियल प्रोडक्ट को लाॅन्च कर सकेंगे। ये सभी वेयर हाउसेस आपस में जुड़े होंगे। इससे कलकत्ता में बैठे व्यक्ति को अगर बैंग्लुरू में बैठे व्यक्ति की मदद चाहिए तो ये मिल मिल जाएगी। फिलहाल कलकत्ता और बैंग्लुरू में ही ये सेंटर्स हैं। धीरे-धीरे बाकी वेयर हाउसेस को भी एक्सीलेंस सेंटर्स में बदला जाएगा। इसके लिए प्लानिंग की जा रही है।

पुष्विंदर बताते हैं कि लोंगोवाल कॉलेज, पंजाब में टीचिंग के दो साल में उन्होंने अपना मार्केटिंग सर्वे किया। इस तरह दो बिजनेस ऐसे थे जो वह कम रकम में शुरू कर सकते थे। दवाओं की रिटेल चेन और मेकिंग। उन्होंने दोनों शुरू करने की ठानी। मार्केटिंग के लिए उन्होंने सबसे पहले अपनी कंपनी का एड्रेस मुंबई का दिया लेकिन बाद में उन्होंने अपनी क्वालिटी से बता दिया कि अच्छी कंपनियां मुंबई से बाहर भी हो सकती हैं। वह चाहते थे कि उन्हें अच्छे क्लाइंट मिलें इसलिए अपने विजिटिंग कार्ड पर सेल्स मैनेजर छपवाया था। शुरू में मार्केटिंग के लिए बेशक कई कहानियां गढ़ी लेकिन क्वाॅलिटी में कभी समझौता नहीं किया। इस काम में परिवार का भी पूरा साथ मिला।

टीचिंग के दौरान किया सर्वे, फिर हेल्थ केयर में उतरे पुष्विन्दर सिंह