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व्यर्थ के कामों में जीवन काे गवाएं:मुनि विनय
जीवनएक अवसर है जो बहुत ही अनमोल है। जिसे इंसान कोड़ियों के भाव गंवा रहा है, आज का इंसान जो सिर्फ भोग विलासा मे ही लिप्त है वह भूल गया है कि उसे यह तन किस उद्देश्य के लिए मिला है। सारा जीवन भोग विलास व्यर्थ की निंदा चुगली, छिना झपटी, मारपीट ना जाने क्या क्या। वह जीवन के स्वांसो की घडियों को नष्ट किए जा रहा है। देश में जितने भी प्रबुद्ध संत और विचारक हैं, सभी यही कहते हैं, आपको पता होना चाहिए कि कैसे जीना है। आपका जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसे खेल-खेल में यूं ही बिता देना अविवेकपूर्ण निर्णय है। इसी जीवन से लोगों ने दिव्यता प्राप्त की है। एेसे ही लोगों की आज हम जयंतियां मनाते हैं, लेकिन जो लोग जीवन को यों ही बिता देते हैं उनका जीवन कभी जीवन नहीं बन पाता। उसी व्यक्ति को याद किया जाता है, जो याद करने योग्य काम करता है। ये शब्द मुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक ने अणुव्रत भवन सेक्टर-24 तुलसी सभागार में रविवार सभा को संबोधित करते हुए कहे।