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जीएमसीएच में महंगी डाइट के लिए मजबूर हुए मरीज और अटेंडेंट
एडमिटमरीजोंऔर अटेंडेंट को अगर हॉस्पिटल से मिलने वाली डाइट के चार्ज दो महीने पहले ही 100 फीसदी तक बढ़ा दिए गए। जनरल वार्ड में एडमिट किसी मरीज को अगर हॉस्पिटल से ही खाना लेना है तो उसे 85 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। स्पेशल वार्ड में तो अटेंडेंट को इस खाने के लिए अब डेढ़ 100 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। ऐसे में मरीज या अटेंडेंट इस बोझ से बचने के लिए अपने घर से खाना मंगवाते हैं तो अब वो खाना लाना भी अब रोक दी है। इस तरह मरीजों पर पहले ही इलाज के खर्च के साथ जबरदस्ती हॉस्पिटल का खाना खाने के लिए मजबूर करके और बोझ डाला जा रहा है। सेक्टर 32 के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मरीजों के साथ ये खेल खेला जा रहा है।
सिक्योरिटीस्टाफ ने रोका खाना
पिछलेसाल दिसंबर में जीएमसीएच प्रशासन ने फैसला लिया कि मरीजों को हॉस्पिटल में मिलने वाली डाइट के रेट बढ़ा दिए गए। मरीज की डाइट जनरल वार्ड में 50 रुपए और अटेंडेंट की 85 रुपए कर दी गई। ये ही डाइट मरीज के लिए स्पेशल वार्ड में 70 रुपए और अटेंडेंट के लिए 75 रुपए से बढ़ाकर 150 रुपए कर दी गई। मरीजों पर पड़े इस बोझ से बचने के लिए यहां एडमिट मरीज के शहर में रहने वाले लोग घरों से खाना लाने लगे। लेकिन अब बाहर से खाना लाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। इतना ही नहीं, मरीज को दिए जाने वाले फ्रूट भी बाहर से लाने पर रोक लगा दी गई है। इस हालत में मरीजों के लिए फ्रूट भी हॉस्पिटल के अंदर महंगे रेट पर खरीदने पड़ रहे हैं।
जानकारी में नहीं, ऐसा है तो देखेंगे: प्रो. सचदेवा
जीएमसीएचके डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. अतुल सचदेवा घर से खाना लाने या अटेंडेंट के अंदर सोने पर रोक लगाने जैसा कोई फैसला नहीं लिया गया। अगर ऐसा हुआ है तो इस बारे में जानकारी हासिल करके मरीजों या अटेंडेंट को ही रही असुविधा से छुटकारा दिलाया जाएगा।
अटेंडेंट के अंदर सोने पर भी लगा दी गई रोक
यहांएडमिट मरीजों के अटेंडेंट को रात में सोने के लिए भी हॉस्पिटल से बाहर कर दिया गया है। गायनी और फीमेल वार्ड में अटेंडेंट पहले बाहर साथ लगते बरामदे में आराम करते थे। ताकि रात में जरूरत पड़ने पर मरीज का ख्याल रख सके या जरूरी सामान समय पर ला सकें। अब मरीजों को बाहर निकाल दिया गया है। ये अटेंडेंट अब रात को बाहर सोने को मजबूर हैंै। मरीज का हाल जानना हो तो रात भर बाहर जागते हुए काटकर बार बार वार्ड तक जाना पड़ रहा है।