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- राजबीर सिंह राणा | चंडीगढ़ Rs.rana@dbcorp.in
राजबीर सिंह राणा | चंडीगढ़ rs.rana@dbcorp.in
राजबीर सिंह राणा | चंडीगढ़ rs.rana@dbcorp.in
नगर निगम ने शहर के सेनिटेशन सिस्टम को ऑनलाइन करने का दो दिन से ट्रायल शुरू किया हुआ है। ट्रायल के सफल रहने के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस सिस्टम से शहर के हर सेक्टर/कॉलोनी या गांव से उठाए जाने और नहीं उठने वाले गारबेज बिन की जानकारी अफसरों तक पहुंचने लगेगी। इस सिस्टम के चलने से शहर में प्रॉपर गारबेज बिन उठने लगेंगे। नगर निगम ने सेनिटेशन सिस्टम को ऑनलाइन करने के लिए डंपिंग ग्राउंड पर कंप्यूटर रूम बनाया है। इसमें एनआईसी की ओर से तैयार करवाए गए सॉफ्टवेयर में गाड़ियों के नंबर और गारबेज बिन नंबर एंटर हैं। एरियावाइज रखे गए गारबेज बिन का रिकाॅर्ड भी साॅफ्टवेयर में ऑनलाइन किया गया है। इस सिस्टम को डंपिंग ग्राउंड में कंप्यूटर रूम बनाकर शुरू किया गया है। कंप्यूटर को हैंडल करने के लिए एक डाटा एंट्री ऑपरेटर बैठाया गया है। कंप्यूटर रूम की विंडो रोड साइड खोली गई है। उस विंडो पर गाड़ी के ड्राइवर को गारबेज प्रोसेसिंग यूनिट में कूड़ा डालने से पहले अपना गाड़ी और गारबेज बिन का नंबर दर्ज करवाना पड़ता है।
शहरमें रखे हैं 500 से ज्यादा बिन: शहरके सेक्टर/कॉलोनी और गांव में रोड किनारे निगम ने 500 से ज्यादा गारबेज बिन नंबरिंग करके रखे हुए हैं। जिस सेक्टर या कॉलोनी का गारबेज बिन नहीं उठ रहा है, उसकी जानकारी अफसरों तक मिलने लगी है। इसके आधार पर अफसरों द्वारा संबंधित सेनिटरी इंस्पेक्टर या चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर को डायरेक्शन दी जाने लगी है। ऑनलाइन सेनिटेशन सिस्टम का ट्रायल सफल होने पर ही इसे इम्प्लीमेंट किया जाएगा। सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आए, इसलिए ट्रायल कई दिन तक चलाया जाएगा।
कागजोंमें ज्यादा चलती रही हैं गाड़ियां: निगमकी करीब 40 गाड़ियां रोज सेक्टर/कॉलोनियों और 9 गांवों से गारबेज उठाकर गारबेज प्रोसेसिंग यूनिट पहुंचाती रही हैं। इनमें से गारबेज प्रोसेसिंग यूनिट तक कम गाड़ियां पहुंचती थी जिस कारण गारबेज बिन कई-कई दिन बाद उठते थे। हालांकि गाड़ियों के सरकारी कागजों में ज्यादा फेरे लगते रहते थे। इससे डीजल की कंजप्शन बढ़ रही थी पर गारबेज प्रॉपर उठ नहीं रहा था। अब हर गाड़ी और बिन की एंट्री के अलावा गाड़ियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होने लगा है।