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जागो री...जागो री: इन आंखों के सपनों की कौन समझे अहमियत

6 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. कमलाभसीन के गीत जागो री . . .जागो री . . की धुनों के बाद बजता हुआ ढोल। ढोल की धुन पर पंजाबी बोल के साथ औरतों को सम्मान देने की बात।

ये था जागो री चंडीगढ़ और वन बिलियन राइजिंग हैंड का प्रयास। पीयू के स्टूडेंट सेंटर पर पीजीजीसी-11 और पी जीजीसी-42 की स्टूडेंट्स फ्लैश मॉब के जरिए लड़कियों के प्रति हिंसा रोकने और वुमन एम्पावरमेंट का मैसेज दे रहे थे। वहीं पास में बैठी दो लड़कियां इस तरह खुद में खोई दिखीं मानों अपने अधिकारों की सोच रही हों। दो वक्त रोटी के लिए काम करने वाली इन लड़कियों की आंखों में भी सपने थे, बस जरूरत महसूस हुई तो उनके सपनों को उड़ाने देने की।