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पीजीअाई में क्यों नहीं मिल सकता मरीजों को एम्स जैसा सस्ता इलाज

6 वर्ष पहले
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अधीर रोहाल | चंडीगढ़ adhir.rohal@gmail.com

पीजीआईनेइस बार भी अगर 13 साल पहले की लापरवाही नहीं रिपीट की तो पीजीआई में भी मरीजों को एम्स जैसा सस्ता इलाज मिलना शुरू हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई से पूछा है कि पीजीआई और एम्स में मरीजों के इलाज के चार्जेज एक बराबर क्यों संभव नहीं है।

पूर्व एनडीए सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री शत्रुघन सिन्हा की अध्यक्षता में पीजीआई की सुप्रीम इंस्टीट्यूट बॉडी (आईबी) की मीटिंग में मरीजों के इलाज का खर्च एम्स के बराबर लाने का फैसला हुआ था। लेकिन पीजीआई ने ये फैसला लागू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लेकिन 8 फरवरी को हुई आईबी की मीटिंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पूर्व एनडीए सरकार के इस फैसले को अब लागू करने की मांग रखी गई थी। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई से यहां के मरीजों को एम्स जैसी राहत देने की मॉडलिटिज तय करने के बारे में पूछा है।

2002 में भी मीटिंग से पहले ही पीजीआई मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अश्वनी मुंजाल ने चार्जेज बढ़ाने के फैसले को लागू करने की बजाय हॉस्पिटल चार्ज एम्स के बराबर करने की मांग की थी। उनकी मांग पर ही आईबी ने पीजीआई को ये चार्जेज एम्स के बराबर करने का फैसला किया था। लेकिन पीजीआई ने पूरा केस लटकाए रखा।

पीजीआई की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की 28 सितंबर 2002 को मीटिंग में हॉस्पिटल चार्ज बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। लेकिन 29 सितंबर 2002 को पीजीआई आईबी की मीटिंग में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री शत्रुघन सिन्हा की मौजूदगी में सिफारिश को ठुकरा दिया। आईबी ने पीजीआई को हॉस्पिटल चार्जेज एम्स के बराबर करने के निर्देश भी दिए। आईबी के फैसले के बाद अगले साल 12 मई को हुई पीजीआई गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में पीजीआई को एम्स के बराबर कॉम्परेटिव स्टेटमेंट तैयार करने के निर्देश दिए गए। पीजीआई ने ये स्टेटमेंट बनाकर पीजीआई की सभी अपेक्स बॉडी को दे दी लेकिन 2004 में सरकार बदलने के बाद पीजीआई ने नई बनी आईबी और जनरल बॉडीज को कोई जानकारी ही नहीं दी।

ये है एम्स और पीजीआई में इलाज खर्चे में फर्क

कार्ड बनाने के लिए खर्चा

{पीजीआई10 रुपए/ एम्स फ्री

जनरलवार्ड में एडमिट मरीज से डाइट, बेड और रुटीन लैब चार्ज

{पीजीआईमें 115 रुपए/ एम्स में 35 रुपए

एडमिटऔर ओपीडी में लीवर की एमआरआई

{पीजीअाईमें 100 रुपए/ एम्स में फ्री

जनरलवार्ड में एडमिट मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करने पर

{पीजीआईमें 300 रुपए/ एम्स में आईसीयू के एक्स्ट्रा चार्ज नहीं

लीवरफंक्शनिंग टेस्ट

{पीजीअाईमें 100 रु/ एम्स में फ्री

एमआरआई,सीटी स्कैन, एक्सरे और बायो केमिस्ट्री के एक टेस्ट खर्च

पीजीआईमें 100 रुपए/ एम्स में 25-35 रुपए

अश्वनी मुंजाल कहते हैं कि पीजीआई और एम्स पार्लियामेंट एक्ट के तहत बनाए गए हैं। दोनों ही संस्थानों में एक बराबर नियम फॉलो हाेने चाहिए। मरीजों को अगर एम्स जैसी सुविधाएं नहीं दे सकते तो मरीजों से हॉस्पिटल चार्जेज भी एम्स से ज्यादा क्यों वसूल जा रहे हैं। पीजीआई आईबी 2002 में ये चार्ज कम करने का फैसला कर चुकी है। लेकिन अब अगर ये राहत मरीजों को नहीं मिली तो हाइकोर्ट में पीआईएल की जाएगी।

पीजीआई में एम्स के बराबर चार्जेज होने का फायदा यहां एडमिट होने वाले मरीजों के अलावा ओपीडी में आने वाले लाखों मरीजों को मिलेगा। ओपीडी में हर साल 21 लाख लोग आते हैं। इस तरह हर साल यहां लगभग एक लाख लोग एडमिट होते हैं।