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प्रेम से दूर कर सकते हैं बुराइयों को: मुनि विनय
बुराइयोंको द्वेष की अपेक्षा प्रेम से दूर करना ज्यादा सरल है। इसी प्रकार प्रेम के आधार पर ही मनुष्य वीर बन सकता है। प्रेम ही है, जो अंधकार को प्रकाश में, निर्जीवता को जीवन में और मरघट को उद्यान में बदल देने की शक्ति रखता है। जैसे आग का गुण ऊष्णता है, वैसे ही आत्मा का गुण प्रेम है। गलत प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों में भी प्रेम होता है, लेकिन वह उनकी गलत प्रवृत्तियों के नीचे दब जाता है। ये प्रवचन मुनि विनयकुमार आलोक ने अणुव्रत भवन सेक्टर-24 में दिए। मुनि ने कहा कि प्रेम की महिमा जहां हर पंथ ने गाई है, वहीं सभी ने मोह को व्यक्ति से लेकर राष्ट्रहित तक के लिए घातक बताया है। प्रश्न उठता है कि प्रेम और मोह में अंतर कैसे किया जाए। इसे इस प्रकार समझ सकते हैं कि वह प्रेम जो कर्तव्य पालन में बाधा बन जाए, वह मोह है। स्वार्थ मुक्त होकर युगधर्म का शिक्षण देने वाला प्रेमभाव विकसित करने के लिए हर पंथ पुकारता है।
सत्य के समान कोई धर्म नहीं है। सत्य सृष्टि का मूल है। सत्य ही सबसे बड़ा तप है, सत्य ही सबसे बड़ा धर्म है। सत्य ही पुण्यशाली कर्म और सबसे बड़ी सिद्धि है। सत्यनिष्ठ व्यक्ति दुष्कर्म, अवसाद, अपयश, अशांति, असंतोष और अपमान से बचा रहता है।
जीवन में उन्नति और उत्कर्ष के लिए सत्य ही सबसे सच्चा मार्ग है। पवित्र हुई वाणी बोलें और मन से जो पवित्र जान पड़े, उसी का आचरण करें। मन, वचन और कर्म को एकरूप किए बगैर हम, कितना ही प्रयास क्यों करें, पर हम सिद्धि की प्राप्ति नहीं कर सकते। सत्य और सरलता का अटूट संबंध है। सत्य अिहंसा के बिना अधूरा है। इस बात को ध्यान रखना जरूरी है।
मुनि ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि सत्य सरल होता है। हमारी भलाई इसी में है कि हम इस जगत के सत्य को पहचानें, सत्य के पथ पर चलने का संकल्प लें। सत्य का वास्तविक अर्थ परब्रह्म है। वेदों के वक्तव्य हैं कि सृष्टि के मूल में यही ब्रह्म सत्य रूप में विद्यमान था, त्रिगुणात्मक संसार इसके बाद में रचा गया। जिसके चित्त ने सत्य को छोड़ दिया, उसे भला आनंद की प्राप्ति कैसे हो सकेगी। यदि आनंद की तलाश है, तो सत्य के मार्ग पर चलना होगा।
आसा राम बापू की पावन प्ररेणा से 14 फरवरी शनिवार को मातृ पितृ पूजन दिवस का आयोजन पर शहर में विशाल संकीर्तन यात्रा निकाली जाएगी। इय यात्रा कार्यक्रम में स्कूलों के स्टूडेंट्स उनके माता पिता भी हिस्सा लेंगे। ये यात्रा सेक्टर 23 के सनातन धर्म मंदिर से सुबह 10 बजे शुरू हाेगी। सेक्टर 33, 21, 20 की मार्केट से होती हुई सेक्टर 20 के लक्ष्मी नारायण मंदिर धर्मशाला में संपन्न होगी। यहां पर दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक सामूहिक मातृ पितृ पजून कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।