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लुबाणा की जमानत याचिका फिर खारिज

6 वर्ष पहले
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शहरकेकॉन्वेंट स्कूलों के बच्चों के साथ दोस्ती कर उनसे वसूली करने वाले गैंग के तीन आरोपियों में से एक रतन लुबाणा की जमानत याचिका कोर्ट ने फिर से खारिज कर दी है।

इससे पहले रतन लुबाणा की जमानत याचिका को लेकर 2 फरवरी को कोर्ट ने फैसला दिया था, जिसमें भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले एसीजीएम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज किया था।

इसके बाद आरोपी पक्ष की तरफ से एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज की कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर वीरवार को हियरिंग हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों के बयान सुनने के बाद आरोपी रतन लुबाणा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। काॅन्वेंट स्कूल के बच्चों के साथ दोस्ती करने और बाद में गुमराह कर रुपए लेने के इस मामले में लुबाणा को दो और आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में किशनगढ़ निवासी और पूर्व जिला परिषद प्रधान भजन सिंह के बेटे रतन लुबाना, सेक्टर-20बी के रहने वाले अमितोज सिंह और डेराबस्सी के गांव जनेतपुर के रहने वाले राजवीर सिंह को पुलिस ने बच्चों से रुपए वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

झूठे केस में फंसाने की दी थी दलील

इससेपहले शुक्रवार और शनिवार को आरोपी रतन लुबाणा की जमानत याचिका को लेकर हियरिंग हुई थी। हियरिंग में पुलिस ने जहां जमानत याचिका को खारिज करने की मांग की थी, वहीं आरोपी के पक्ष में कहा गया था कि क्योंकि वो राजनीतिक घराने से संबंध रखता है इसलिए उसको झूठे केस में फंसाया जा रहा है, इसलिए उसकी जमानत याचिका को मंजूर किए जाने की मांग की गई थी। वहीं, सरकारी वकील इसके खिलाफ था। उनका तर्क था कि आरोपी डरा धमका सकते हैं या नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जब इन आरोपियों को लगता था उनके रसूख और डराने से बच्चों में उनका डर बन गया है तो वे उनसे उनके घर में रखे रुपए और अन्य सामान लाने के लिए कहते थे। डिमांड में कई बार मंह गी शराब, रुपए अन्य मंहगा सामान होता था। 150 बच्चों से वे वसूली कर चुके थे।

तीनों आरोपी पहले शहर के बड़े स्कूलों के बच्चों के साथ दोस्ती करते। दोस्ती करने के बाद उनको गुमराह कर उनसे रुपए वसूलते थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि मामला गंभीर है, क्योंकि बच्चों को टारगेट कर उनसे रुपए तो वसूले ही जा रहे थे साथ ही बच्चों को उनके अपने घरों में ही चोरी के लिए भी उकसाया जा रहा था। तीनों आरोपियों के संपर्क में शहर के चार बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले वे बच्चे थे जो बड़े घरों के थे। जांच में पता चला कि तीनों आरोपी सिर्फ उन्हीं बच्चों को फंसाते थे जिनके मां-बाप हाई प्रोफाइल सोसायटी के हो। इंक्वायरी के मुताबिक अमीर मां बाप के बच्चों को दोस्त बनाने के बाद तीनों उनके साथ अलग अलग जगहों पर घूमने के लिए जाते और बड़े होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाते-पीते थे। दोस्ती होने के बाद बच्चों को ये एहसास करवाया जाता कि उनका कितना रसूख हैं। इसके लिए हथकंडे ये तीनों अपनाते थे। कभी अपनी सोशल प्रोफाइल हथियारों के साथ फोटो अपलोड करते थे।

दोनों बार सरकारी वकील की तरफ से एक ही दलील पर जमानत याचिका खारिज हुई है। वीरवार को भी सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि अगर आरोपी को जमानत मिल जाती है तो इस मामले में शिकायत करने वालों को डरा धमका सकता है या नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लिए उनको हिरासत में ही रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को सही माना और जमानत याचिका खारिज की।