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होटल, रेस्तरांं में बिल अमाउंट पर डबल टैक्स क्यों: हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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पंजाब,हरियाणाचंडीगढ़ में होटल रेस्तरांं मालिकों द्वारा ग्राहकों पर डबल टैक्स वसूली को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर प्राथमिक सुनवाई के बाद कार्यवाहक चीफ जस्टिस आशुतोष मोहंता जस्टिस एचएस सिद्धू की खंडपीठ ने 9 दिसंबर के लिए पंजाब हरियाणा सरकार तथा चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा कि आखिर बिल अमाउंट पर डबल टैक्स क्यों लगाया जा रहा है। इस मामले में सरकार का क्या कहना है। कोर्ट ने चंडीगढ़ की होटल एवं रेस्तरांं ऑनर्स एसोसिएशन को भी इस मामले में पार्टी बनाया है।

चंडीगढ़ की स्वयंसेवी संस्था सुखमनी फाउंडेशन की तरफ से दाखिल याचिका में होटलों रेस्तरांं में बिलों पर लगने वाले टैक्स के तरीके को गलत ठहराया गया है। संस्था की तरफ से एडवोकेट मुनीश कपिला ने कोर्ट में कहा कि हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में होटल मालिकों द्वारा टैक्स नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ग्राहकों को कुल बिल की राशि पर टैक्स देना पड़ रहा है। नियम के अनुसार कुल बिल की राशि के 40 प्रतिशत पर सर्विस टैक्स और 60 प्रतिशत राशि पर वैट लगता है। याची ने ऐसे कुछ बिल पेश करते हुए कहा कि इन बिलों में पहले तो पूरी बिल राशि पर सर्विस टैक्स जोड़ा गया और बाद में कुल राशि पर ही वैट लगाकर बिल बनाया गया।

पैसा वसूल कर रिलीफ फंड में डाला जाए

याचिकामें कहा गया कि पंजाब, हरियाणा तथा केंद्र के एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट विभाग इस मामले का हल निकालने में असफल रहे हैं। ऐसे में होटलों द्वारा बिलों पर डबल टैक्स लगाए जाने के मामले में राज्य सरकार को जांच करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही डबल टैक्स लगाने वाले होटल रेस्तरांं से ग्राहकों से की गई कमाई की वसूली की जाए। कोर्ट चाहे तो आगे इस वसूली गई राशि को नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड में दे दिया जाए। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पंजाब सरकार के एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर तथा चंडीगढ़ के सर्विस टैक्स कमिश्नर को नोटिस जारी करते हुए मामले पर जवाब तलब किया है।