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ईडी पीसी. कश्यप को साई ने दी जबरन रिटायरमेंट
स्पोर्ट्सअथॉरिटी ऑफ इंडिया(साई) चंडीगढ़ के पूर्व रिजनल डायरेक्टर और अब दिल्ली में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर तैनात डॉ. पीसी कश्यप को साई ने घपले के आरोप में कंपलसरी रिटायरमेंट दे दी। साई के 30 साल के इतिहास में पहली बार किसी बड़े अधिकारी को कंपलसरी रिटायरमेंट दी गई है। उनके खिलाफ साई के पैसों के दुरूपयोग के आरोप में 2013 में जांच बिठाई गई थी। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के पूर्व संयुक्त सचिव केएस बाजवा ने यह जांच की थी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर साई के डीजी ने 9 सितंबर को आदेश जारी कर यह कारवाई की है। भास्कर के पास मौजूद साई के ऑर्डर की कॉपी के मुताबिक वर्ष 2000 में चंडीगढ़ के रिजनल डायरेक्टर के पद पर रहते हुए उन्होंने 20 हजार एडवांस लिए थे जबकि साई के नियमों के मुताबिक वह यह नहीं कर सकते थे। बाद में जांच के दौरान वह इसका कोई साफ कारण भी नहीं बता सके कि आखिर किस मकसद के लिए उन्होंने ऐसा किया।
भास्कर के पास मौजूद ऑर्डर की कापी के मुताबिक 16 अप्रैल 2000 को कश्यप ने 3594 रूपए की एक गोल्ड रिंग साई फंड के पैसों से खरीदी। कश्यप ने यह रिंग उस वक्त के केंद्रीय खेल मंत्री के बेटे की शादी में गिफ्ट की थी। जबकि नियमों के मुताबिक बतौर आरडी तो उनकी फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर उन्हें इस तरह रिंग खरीदने की परमिशन देती हैं। जांच के दौरान कश्यप ने कहा कि उन्हें तब के साई के डीजी ने शादी में जाने के लिए कहा था। लेकिन जांच में सामने आया कि शादी में जाने के लिए कहा गया था कि गोल्ड रिंग देने के लिए।
30 साल में पहली बार हुआ ऐसा
भास्कर ने इस बारे में जब कश्यप को फोन किया तो उन्होंने कहा कि मैं अभी बिजी हूं, थोडी देर में बात करते हैं। लेकिन बाद में उन्होंने फोन नहीं उठाया। साई को बने 30 साल हो गए हैं। किसी अधिकारी को कंपलसरी रिटायरमेंट पहली बार दी गई है। सूत्रों के मुताबिक कश्यप को डिसमिस भी किया जा सकता था लेकिन इससे उन्हें पेंशन भी रूक जाती। अब उन्हें समय से पहले रिटायर कर साई से बाहर कर दिया गया है।
कश्यप की दलीलें काम नहीं आईं
रिपोर्ट के आर्टिकल 2 के मुताबिक कश्यप ने साई के पैसों से ही नियमों को ताक पर रख 9500 का नोकिया का हैंडसेट खरीदा। तो उनके पास इसकी पावर थी और ही किसी की परमिशन। साई ने अपनी पोजिशन का मिसयूज माना। कश्यप को अपनी सफाई में 1 मार्च 2014 को लिखित में अपन