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पिछले चुनाव में पार्टियों ने प्रचार पर किया सबसे ज्यादा खर्चा

7 वर्ष पहले
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हरियाणामेंराष्ट्रीय पार्टियों ने पिछले चुनाव में बाजार से 13.78 करोड़ रुपए का चंदा लिया था। जबकि चुनाव में महज 12.01 करोड़ रुपए ही खर्च किए। इस तरह इन दलों ने करीब 1.77 करोड़ रुपए बचा लिए थे। क्षेत्रीय पार्टियों की स्थिति इसके विपरीत रही। इन पार्टियों को चंदा केवल 1.96 करोड़ रुपए ही मिला, जबकि चुनाव में इनका खर्चा 3.86 करोड़ रुपए हो गया। पिछले चुनाव में राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों पर तो केवल 20 प्रतिशत पैसा ही खर्च किया, जबकि 70 फीसदी पैसा चुनाव प्रचार-प्रसार पर खर्च किया गया। वर्ष 2009 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ही ऐसी एकमात्र पार्टी रही जिसने चुनाव के नाम पर तो किसी से कोई चंदा लिया और ही किसी तरह का खर्चा किया। इस चुनाव में उसके टिकट पर केवल एक विधायक अकरम खान जीते थे। जबकि भाजपा ने तो चंदे और चुनाव खर्च का हिसाब ही आधा-अधूरा दिया है। हरियाणा इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफोर्मस (एडीआर) के मुताबिक राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग को दिए गए चुनावी चंदे और खर्च के हिसाब-किताब से यह खुलासा हुआ है।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफोर्मस के निदेशक अनिल वर्मा का कहना है कि सभी राजनीतिक दल चुनाव के दौरान चंदा देने वाले लोगों के नाम-पते और राशि को सार्वजनिक करें।

किस पार्टी ने कितना चंदा लिया और कितना खर्च किया

पार्टीकरोड़ खर्च

कांग्रेस12.10 10.77

भाजपा 1.59 1.16

हजकां 1.66 1.69

इनेलो 0.30 2.18

नोट:राशि करोड़ रुपए में स्रोत-एडीआर रिपोर्ट

हजकां का सबसे महंगा, इनेलो का सबसे सस्ता एमएलए

वर्ष2009 के चुनाव में हजकां को एक एमएलए पर औसतन 27.66 लाख रुपए खर्च करने पड़े, जबकि इनेलो एक विधायक पर सबसे कम औसतन 6.38 लाख रुपए ही खर्च करने पड़े। कांग्रेस का प्रति विधायक खर्चा 19.05 लाख रुपए पड़ा। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 7.62 करोड़, इनेलो ने 1.98 करोड़ और 1.66 करोड़ रुपए प्रचार पर खर्च करना बताया है। इतना खर्च करने के बाद कांग्रेस के 40, इनेलो के 31 और हजकां के 6 विधायक चुनाव जीत पाए।

ट्रांसपेरेंसी में इनेलो सबसे आगे: चुनावीचंदे और खर्च के मामले में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की ज्यादा पारदर्शिता रही। पार्टी ने बाजार से लिए गए चंदे की पूरी राशि का खुलासा किया। इसमें केवल 30 लाख रुपए ही नगद में लेना बताया है। जबकि हरियाणा जनहित कांग