नेता कर रहे हैं वोटर का फैसला
हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए 15 अक्टूबर को मतदान होना है। प्रदेश की राजगद्दी पर वोटर किसे बिठाएगा, फिलहाल पंडित और ज्योतिषी भी इसकी भविष्यवाणी नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन हमारे सभी दलों के नेता तो जैसे वोटर के दिल में घुस गए हैं। वोटर का फैसला तो 19 अक्टूबर को आएगा, लेकिन सभी नेता बहुत कॉन्फीड़ेंस के साथ यह दावे कर रहे हैं कि राजगद्दी तो उन्हें ही मिलेगी। करीब साढ़े नौ साल तक सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के हर अच्छे-बुरे काम में साथ निभाने वाले चार पूर्व सांसद शनिवार को चंडीगढ़ में एक ही मंच पर थे। इस समय इन चारों ही पूर्व सांसदों के अलग-अलग दल और अलग-अलग रास्ते हैं। मंच पर सार्वजनिक रूप से सभी दावे कर रहे थे कि वोटरों ने प्रदेश की सत्ता उन्हें ही सौंपने का मन बना लिया है। सामने बैठे दर्शकों से रहा नहीं गया तो कुछ दर्शकों ने इनसे सवाल कर लिया कि इतने दिन तक तो आप उसी सत्तारूढ़ पार्टी और सीएम के वफादार रहे, लेकिन चुनाव के ऐनवक्त पर आपकी वफादारी को क्या हो गया कि आप उन्हें छोड़कर बाहर गए। हालांकि इन सभी सांसदों ने इसके लिए अपने-अपने तर्क दिए और कारण गिनाए। इनमें एक ने तो करप्शन के लिए लोगों को ही जिम्मेदार ठहराया, जबकि बाकी तीन ने करप्शन, क्राइम और विकास एवं नौकरियों में भेदभाव के लिए सीएम को ही जिम्मेदार बताया। अब दर्शकों में गुफ्तगू हो रही थी कि सीएम हुड्डा ने इन्हें मलाईमार की संज्ञा सही ही दी है।