13 सीटों पर भाजपा नेताआंे की बगावत
कई पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ी, कहीं खुली बगावत तो कहीं भितरघात का खतरा
भास्करन्यूज | चंडीगढ़
मूलकार्यकर्ताओंकी उपेक्षा करके बाहरी प्रत्याशियों को टिकट दिए जाने से हरियाणा भाजपा में मचा बवाल अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को भी कालका, फरीदाबाद और लोहारू सीटों पर कार्यकर्ताओं ने खुली बगावत करते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। जबकि अगले एक-दो दिन में कुछ और सीटों पर कार्यकर्ता पार्टी छोड़ने का फैसला कर सकते हैं। भारी अंतर्कलह से जूझ रही भाजपा को करीब 13 सीटों पर बागियों के कारण चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार कुछ जगहों पर प्रत्याशियों और नेताओं ने कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की है, लेकिन विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं कार्यकर्ता खुलकर विरोध कर रहे हैं तो कहीं अंदरखाते बाहरी प्रत्याशियों को हराने की बातें हो रही हैं। जिन सीटों पर अनुशासन के कारण कार्यकर्ता खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं, उन्होंने प्रत्याशियों और चुनाव प्रचार से दूरी बना ली है।
प्रचारशुरू नहीं कर पा रहे हैं भाजपा प्रत्याशी
टिकटघोषित होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशियों का अधिकांश टाइम तो रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने और समझाने में ही बीत रहा है। इसकी वजह से वे तो नामांकन ही भर पा रहे हैं और ही अपना चुनाव प्रचार शुरू कर पा रहे हैं। पार्टी नेताओं का भी मानना है कि 1 अक्टूबर तक तो कार्यकर्ताओं को मनाने और समझाने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद ही प्रचार अभियान शुरू हो पाएगा।
इनसीटों पर है बागियों के खड़े होने का खतरा
फरीदाबाद,बड़खल, पटौदी, बावल, नारनौल, रोहतक, कलायत, अंबाला सिटी, मुलाना, कैथल, कालका, लाडवा और करनाल। इसकी वजह यह है कि इन सीटों पर पार्टी के ऐसे मूल और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई है जो काफी लंबे समय से अपने प्रचार में लगे हुए थे। इनका मानना था कि हरियाणा में पहली बार भाजपा अकेले ही 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अभी तक केवल 4 विधायक होने के कारण पार्टी के पास अच्छे प्रत्याशियों की कमी थी। ऐसे में पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। जहां मूल कार्यकर्ताओं का अभाव था, वहीं बाहरी प्रत्याशियों को टिकट दिए जाने चाहिए थे।
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