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अब टाइमपास कर रही पुलिस, डीजीपी ने जो रिपोर्ट 7 दिन में मांगी वो 15 दिन में भी नहीं दी

7 वर्ष पहले
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शुक्रवार तक आनी थी

सोमवार तक भेजेंगे रिपोर्ट

60 दिन हैं पुलिस के पास

ज्योतिमर्डरकेस की शुरुआती तफ्तीश से लेकर कोर्ट में केस गिरने तक पुलिस का लापरवाह रवैया जारी रहा और दून हलके के विधायक रामकुमार चौधरी समेत सभी आरोपी बरी हो गए। डीजीपी एसएन वशिष्ठ ने केस में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के नाम उजागर करने और केस को चैलेंज करने के लिए डीसीपी पंचकूला की अगुआई में एसआईटी बनाई, जिसे 7 दिनों में रिपोर्ट देनी थी। 15 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं दी गई। पंचकूला पुलिस पॉलीटिकल प्रेशर के चलते अब तक यह फैसला नहीं ले रही कि अब आगे क्या करना है।

एसआईटी ने बुधवार को जांच रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी थी। इस रिपोर्ट को स्टडी कर वापस भेजा गया है और कहा गया है कि जो तीन बार कोर्ट में अलग अलग सप्लीमेंटरी चार्जशीट दायर की गई थी, उसमें कई मजबूत सबूत हैं। उन्हें निकालकर रिपोर्ट के साथ लगाया जाए।

मैंने 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी थी, जो शुक्रवार शाम तक आनी थी। कमिश्नर से इस बारे में पूछा जाएगा। -एसएन वशिष्ठ, डीजीपी

अजय सिंगल, कमिश्नर अंबाला- पंचकूला ने कहा- केस में कई पहलू हैं, जिन्हें निकाला जा रहा है। हर हाल में सोमवार तक रिपोर्ट डीजीपी ऑफिस भेज दी जाएगी।

कानून के मुताबिक जजमेंट हासिल करने के 60 दिन के भीतर ही पंचकूला पुलिस इसे हाईकोर्ट में चैलेंज कर सकती है। लेकिन अब लगातार एसआईटी की जांच रिपोर्ट में देरी भी पुलिस की भूमिका पर संदेह पैदा कर रही है।



अब तीन चार्जशीटों की दोबारा जांच के नाम पर देरी

ज्योति मर्डर केस

पंचकूला पुलिस ने कमजोर किया केस