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पजेशन से पहले एक्सटर्नल चार्जेज नहीं ले सकती एमआर एमजीएफ: कमीशन
चांदगोठिया के अनुसार रिवाइज्ड इडीसी के लिए मांगे 1 लाख 5 हजार 845 रुपए गलत थे क्योंकि यह ईडीसी वर्ष 2014 में रिवाइज्ड हुई थी। जबकि प्लॉट की पजेशन 2013 में दी जानी चाहिए थी।
एमआर एमजीएफ ने क्लब चार्जेज 1 लाख 12 हजार 360 रुपए मांगे, जबकि क्लब अभी तक बना ही नहीं है। चांदगोठिया ने आगे कहा कि इलेक्ट्रिकल चार्जेज वाटर चार्जेज और मेंटेनेंस चार्जेज बिल्डर पजेशन देने से पहले नहीं ले सकता। कंपनी की तरफ से कमीशन में कहा गया कि विवेक मलिक को पजेशन प्लॉट को पूरी तरह से तैयार करने के लिए दिया जा रहा है। और जो भी पैसे की मांग है वह एग्रीमेंट के हिसाब से ही मांगी जा रही है। फोरम ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एमआर एमजीएफ को सेवा में खामी का दोषी मानते हुए उपरोक्त राशि अदा करने के निर्देश दिए हैं। कमीशन का कहना है कि कंपनी को दो महीने में शिकायतकर्ता को प्लॉट का पजेशन दे।
इलेक्ट्रिफिकेशन के मांगे गए करीब 50 हजार रुपए और 7 हजार रुपए वाटर चार्जेज शिकायतकर्ता को तभी देने होंगे, जब वह इन चीजों का इस्तेमाल शुरू कर दे। विवेक मलिक ने एमआर एमजीएफ के मोहाली हिल्स प्रोजेक्ट में 435 स्क्वेयर यार्ड का प्लॉट खरीदा था। उन्होंने प्लॉट की कीमत जुलाई 2012 में 58 लाख 73 हजार रुपए अदा की थी। वकील पंकज चांदगोठिया ने कमीशन को बताया कि इस प्लॉट की पजेशन 3 अक्टूबर 2013 तक दी जानी थी, लेकिन उसमें देरी की जा रही थी। जुलाई 2014 में कंपनी ने पजेशन तो ऑफर कर दी मगर 11 लाख रुपए और मांगे।