- Hindi News
- सुखना लेक में दो दिन में 12 बत्तखों की मौत, माइग्रेटरी बर्ड्स नहीं
सुखना लेक में दो दिन में 12 बत्तखों की मौत, माइग्रेटरी बर्ड्स नहीं
सुखनालेकमें दो दिनों में 12 बत्तखों की मौत हो गई। वीरवार को सात परिंदे मरे पाए गए, बुधवार को पांच की मौत हुई थी। जिन बत्तखों की मौत हुई है वो माइग्रेटरी नहीं हैं, लेकिन एक साथ इतनी मौतों से फॉरेस्ट और एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट की नींद उड़ गई है। एहतियात के तौर पर सुखना लेक में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने अपने इम्प्लॉइज की ड्यूटी लगाई है, जो माइग्रेटरी बर्ड्स को लोकल बर्ड्स से दूर रखेंगे। डिपार्टमेंट के मुताबिक की वजह इन्फ्लुएंजा या वायरल इन्फेक्शन हो सकती है, लेकिन इसका पता पोस्टमॉर्टम के बाद ही चलेगा। मारे गए परिंदों को जालंधर की लैब में भेजा गया है। खतरा इसलिए ज्यादा माना जा रहा है कि केरल से बर्ड इन्फ्लुएंजा की रिपोर्ट आई है। मरने वाले 12 परिंदों की बॉडी को थर्मोकोल के डिब्बों में आईस पैक लगाकर जालंधर भेजा गया है। जालंधर में नॉर्दन रीजनल डिसीज डायग्नोस्टिक लैबोरेट्री (आरडीडीएल) में इन परिंदों का पोस्टमॉर्टम होगा और मौत की वजह पर रिपोर्ट दी जाएगी। चंडीगढ़ प्रशासन यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजेगा।
कुछ खिला कर जीने दें परिंदों को
डिपार्टमेंटने सभी लोगों से अपील की है कि वे लेक पर आकर परिंदों को कुछ भी खिलाएं। लोग यहां आकर परिंदों को पॉपकॉर्न, मसाले वाले तले हुए चने, मूंगफली या अन्य चीजें देते हैं। डिपार्टमेंट के मुताबिक परिंदे इन चीजों को डाइजेस्ट नहीं कर पाते क्योंकि यह उनकी नेचुरल डाइट नहीं है। नमक या मीठे से इनको कई बीमारियां हो जाती हैं।
लैब रिपोर्ट बताएगी वजह
हमनेबॉडीज जालंधर की लैब में भिजवा दी हैं। हो सकता है कि मौसम में बदलाव से ये हुआ हो, लेकिन अन्य वजह भी हो सकती है। सही कारणों का पता लैब की रिपोर्ट के बाद ही चलेगा।-डॉ. लवलेशकांत गुप्ता, ज्वाइंटडायरेक्टर एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट, यूटी चंडीगढ़
सावधानी बरतने को कहा है
जोपरिंदे मरे मिले हैं वे माइग्रेटरी नहीं हैं। एहतियातन सभी इम्प्लॉइज को डायरेक्शन दी है कि माइग्रेटरी बर्ड्स को यहां के परिंदों से दूर रखें। इनकी मौत के पीछे वायरल की आशंका है। संतोषकुमार, कंजर्वेटरऑफ फॉरेस्ट एंड चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, यूटी चंडीगढ़
माइग्रेटरी बर्ड्स को दूर भगाया जा रहा है
डिपार्टमेंटने सुखना लेक पर इम्प्लॉइज की ड्यूटी लगाकर हिदायत दी है कि माइग्रेटरी बर्ड्स को यहां की बत्तखों और लोकल परिंदों के संपर्क में