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परोपकार से बड़ा पुण्य कोई नहीं : मोहन मिश्रा
चंडीगढ़ | जीवनजीने का मुख्य उद्देश्य निर्धन, निर्बल जनों पर परोपकार करना है चौरासी लाख योनियों के बाद यह मनुष्य शरीर प्राप्त होता है, इस शरीर से भगवान के नाम का सुमिरन करना ही मोक्ष का सबसे सरल सुगम उपाय है। पवित्र माद्य मास महाशिव रात्रि के अवसर पर श्री शिव महापुराण की दिव्य कथा में ये प्रवचन कथा व्यास पं मोहन मिश्रा ने श्रद्धालुओं को दिए। उन्होंने बताया कि माता पिता की सेवा सर्वोच्च होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समाज में बड़ी विडंबना है कि बच्चे माता पिता की सेवा करके उनका निरादर करते हैं। उन्होंने गणेश जी का प्रसंग कहते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि माता पिता की सेवा करने से प्रथम सर्वोच्च पद प्राप्त होता है। श्री शिव महापुराण की कथा के श्रवण से शारीरिक आदि व्याधि दूर हो जाती है।