- Hindi News
- पीजीआई में 1 घंटे में पूरा ट्यूमर होगा खत्म
पीजीआई में 1 घंटे में पूरा ट्यूमर होगा खत्म
अधीर रोहाल | चंडीगढ़ adhir.rohal@dbcorp.in
लीवर और पैंक्रियाज के ट्यूमर को अब एक ही बार में एक घंटे में निकालना संभव हो गया है। पीजीआई ने देश में पहली बार इन दोनों तरह के ट्यूमर को निकालने वाला ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है। इरिवर्सेबल इलेक्ट्रोपोरेशन (आईआरई) ट्रीटमेंट के जरिए ट्यूमर के मरीजों को ये राहत मिलेगी। ऐसे मरीजों को अब ट्यूमर निकालने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेडियाे फ्रीक्वेंसी के प्रोसिजर के बाद 20 फीसदी मरीजों में ट्यूमर दोबारा रिवाइव हो जाता था। क्योंकि ट्यूमर पूरी तरह डैमेज नहीं हो पाता था। आइआरई से ट्यूमर को एक ही थैरेपी के बाद पूरी तरह डैमेज करना संभव है। पीजीआई सरकारी क्षेत्र में इस तकनीक का देश का पहला संस्थान बन गया है।
आइआरई तकनीक में न्यूट्रोन से ट्यूमर को डैमेज किया जाएगा। इलेक्ट्रोन को ट्यूमर तक पहुंचाया जाता है। इलेक्ट्रोन सिर्फ ट्यूमर को ही डैमेज करेंगे। ट्यूमर के आसपास खून की नली है तो भी न्यूट्रोन सीधे ट्यूमर पर ही असर करेंगे। ये न्यूटोन ऐसे ट्यूमर को सिर्फ एक बार में खत्म करते हैं इसलिए दोबारा ट्यूमर होने पर इलाज का समय और पैसा बर्बाद नहीं होगा। इस ट्रीटमेंट का खर्चा भी पुरानी तकनीक के बराबर ही है।
अभी रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए हीट जेनरेट करके ट्यूमर को डैमेज किया जाता है लेकिन ट्यूमर के आसपास अगर कहीं ब्लड सप्लाई करने वाली वेसल हैं तो ट्यूमर डैमेज करने के लिए दी गई हीट ट्यूमर को डैमेज करने की जगह वेसल के जरिए बायपास हो जाती है। ऐसे में मरीज को दोबारा ट्यूमर खत्म करने के लिए प्रोसिजर पर लेना पड़ता है। कुछ दूसरे कारणों से भी ट्यूमर एक बार में डैमेज नहीं हो पाता। कुछ समय बाद ट्यूमर दोबारा रिवाइव होने से दोबारा मरीज को प्रोसेस करना पड़ता है।
एक घंटे के प्रोसिजर में पूरा ट्यूमर खत्म
किसी हिस्से पर साइड इफेक्ट नहीं
इस रीजन के प्राइवेट हॉस्पिटल के पास भी ये महंगी मशीन नहीं
यह है खासियत