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बदला दिखा ‘जुगनी’ का रंग, की लड़कियों के हक की बात

6 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ | ‘जुगनी जावड़ी कलकत्ते, ओत्थे इक्कों रोटी पक्के, मियां खावे ते बीवी तक्के, ओए वीर मेरिया वे जुगनीं,...। कुछ ऐसा ही अंदाज रहा पंजाबी लोक गीत जुगनी का, जो हर शहर के दुख, सुख, गरीबी और राजनेताओं पर भी कमेंट करता रहा है। लेकिन मंगलवार को नई जुगनी का अंदाज बदला हुआ था। जुगनी ने बेटियों की बात की। दाद दी उनकी हिम्मत और उनके हौसले को। बयान किया उनके बड़े-बड़े सपनों को। लोक गीत जुगनी के इस नए रूप ‘जुल्म जरा नहीं सैंहदी मैं’ को फ्लैश मॉब के जरिए पेश किया पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स -42 की लगभग 230 स्टूडेंट्स ने। इसे पटियाला के रहने वाले पंजाबी गीतकार बलविंदर सिंह बुलेट ने वन बिलियन राइजिंग के लिए लिखा है।

महिलाअों पर हो रही हिंसा को रोकना है मकसद

दुनियाभर में महिलाओं के प्रति हिंसा रोकने के लिए चल रहे अभियान वन बिलियन राइजिंग के लिए सांझ जागोरी चंडीगढ़ के सहयोग से कॉलेज में ये प्रोग्राम कराया गया था। पंजाबी पारंपरिक गीतों के जरिए लड़कियों ने अपनी जिंदगी में आए बदलाव को पेश किया। जागो री की संयोजक ज्योति सेठ और प्रिंसिपल मनी बेदी भी इस मौके पर मौजूद रहीं।

चंडीगढ़ | ‘जुगनी जावड़ी कलकत्ते, ओत्थे इक्कों रोटी पक्के, मियां खावे ते बीवी तक्के, ओए वीर मेरिया वे जुगनीं,...। कुछ ऐसा ही अंदाज रहा पंजाबी लोक गीत जुगनी का, जो हर शहर के दुख, सुख, गरीबी और राजनेताओं पर भी कमेंट करता रहा है। लेकिन मंगलवार को नई जुगनी का अंदाज बदला हुआ था। जुगनी ने बेटियों की बात की। दाद दी उनकी हिम्मत और उनके हौसले को। बयान किया उनके बड़े-बड़े सपनों को। लोक गीत जुगनी के इस नए रूप ‘जुल्म जरा नहीं सैंहदी मैं’ को फ्लैश मॉब के जरिए पेश किया पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स -42 की लगभग 230 स्टूडेंट्स ने। इसे पटियाला के रहने वाले पंजाबी गीतकार बलविंदर सिंह बुलेट ने वन बिलियन राइजिंग के लिए लिखा है।