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स्टेपिंग स्टोंस स्कूल में हुआ स्किल कंपीटिशन

6 वर्ष पहले
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हाउस अलॉटमेंट मामले में कोर्ट ने सीबीआई को फिर इंक्वायरी के दिए निर्देश

पब्लिक प्लेस में स्मोकिंग तो करें शिकायत

फर्जीडॉक्यूमेंट्सके आधार पर हाउस अलॉटमेंट किए जाने के वर्ष 2009 के मामले में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने दोबारा इंक्वायरी करने के कहा है। मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इस मामले की हियरिंग के दौरान तीसरी बार क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई लेकिन इसको कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जांच एजेंसी ने तीसरी बार मंगलवार को क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। वर्ष 2009 में सीबीआई ने भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामले में जांच भी हुई लेकिन इसमें कुछ भी सामने नहीं सका और ही कोई सबूत मिला। वहीं शिकायककर्ता ने भी क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।

येमामला: शिकायतमें कहा गया है कि यूटी प्रशासन की हाउस अलाॅटमेंट स्कीम में स्लम रिहेबलिटेशन स्कीम भी शामिल थी। इसमें आरोप लगाए गए हैं कि सेक्टर- 52 के चार लोगो ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर उन व्यक्तियों को प्लॉट अवंटित किए थे तो जो अलॉटमेंट के क्राइटेरिया में ही नहीं आते थे। प्लॉट अलॉट कर ने के लिए रुपए के लेन देन के आरोप लगाए गए थे।

कोर्ट में दो क्लोजर रिपोर्ट दी गई है लेकिन वे खारिज हो चुकी हैं। तीसरी क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई जिसमें शिकायतकर्ता का पक्ष जाना गया था। कोर्ट में सीबीआई वकील ने दलील दी थी कि कोर्ट के निर्देशों के बाद डिप्टी कमिश्नर कम एस्टेट ऑफिस ने सेक्टर-52 की सात ट्रांजिट साइट की अलाटमेंट को कैंसिल कर दिया था। अन्य लोगों के कब्जों वाली यह साइट इससे पहले खाली पाई गई थी।

जिन पर कानूनी कार्यवाही के लिए लेटर भी भेजा गया था। इसके चलते 29 नवंबर 2014 को सौंपी गई क्लोजर रिपोर्ट मंजूर किए जाने के लिए कहा गया था। वहीं दूसरी तरफ मामले में शिकायत करने वाले के वकील की तरफ से कहा गया था कि सीबीआई ने जिन साइट का निरीक्षण किया वे पहले से ही खाली थी लेकिन इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन नहीं काटा गया था जिसका रेंट का पिछले दो वर्षों से भुगतान किया जा रहा था।