देशभर में पंजाब में ही आप के चार सांसद
िदल्ली हमारी अब पंजाब की बारी
दि
पाॅजिटिवप्रभाव है। कुछ काम करवाएं हैं।
हरिंदर िसंह
क्षेत्रसे गायब, कोई काम नहीं िकया।
भगवंत मान
क्रेजहै लेिकन क्षेेेत्र में िदखते कम हैं।
आप की दिल्ली में जीत का अकाली दल और भाजपा के गठबंधन का असर दिखाई पड़ सकता है। लेकिन उसके लिए नगर पालिका चुनाव में दोनों पार्टियों की कारगुजारी देखनी होगी। जिस तरह से अकाली दल के नेताओं ने तरनतारन में कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी के भाई राजा जोशी को पीटा, उससे रिश्तों में दरार आनी तय है। पिछले लोकल बाॅडी चुनाव में भी अनिल जोशी की कार तोड़ दी गई थी। पंजाब का लोकल यूनिट चाहता है कि पार्टी पूरी तरह से अलग होकर चुनाव लड़े।
तत्काल असर
{आप:वोट शेयर बढ़ेगा जल्द कोईबड़ा चेहरा तय करना होगा।
{शिअद:सरकार के प्रति नाराजगी दूर करनी होगी। जनताकी समस्याएं हल करनी होंगी।
{भाजपा:बीजेपीके प्रति नाराजगी। जनाधारकायम रखने के लिए विकास कार्य कराने होंगे।
{कांग्रेस:हालातअौर बदतर। गुटबाजीखत्म करनी होगी।
अगले एक साल में
{आप:लीडरशिपतय नहीं की तो खिसक सकता है जनाधार
{ शिअद:एंटीइनकैंबैंसी फैक्टर दूर करने के लिए विकास कार्यों पर जोर।
{भाजपा: तय करना होगा कि गठबंधन में चुनाव लड़ना है या अकेले। आसार कम।
{कांग्रेस: बड़े मुद्दे उठाने से ही चुनाव मैदान में उतरने लायक होंगे।
यदि 2012 के चुनाव को आधार बनाएं तो
{आपने अकाली दल के 8%, कांग्रेस के 7% वोट छीने। पीपीपी को मिले 5.6% वोट भी उनके खाते में ही गए। {बसपा, सीपीआई के वोट शेयर भी शामिल हैं।
-डॉ. मनजीत सिंह, समाजशास्त्री
पंजाब में पॉलिटिकल वैक्यूम है। अकाली दल से लोग उकता चुके हैं। भाजपा चूंकि भाईवाल है इसलिए आटे को प्लेथन लगना ही है। कांग्रेस की पंक्चर गाड़ी में कोई नहीं चढ़ना चाहेगा। ऐसे में आप में उन्हें उम्मीद दिख सकती है लेकिन आप के नेता यह समझें की दिल्ली की रेडिएशन यहां काम करेगी। दिल्ली की तरह उन्हें पंजाब की समस्याओं को समझकर स्ट्रीट फाइट देनी पड़ेगी। आप के लोग जुझारू हैं, इमानदार हैं। वह पहले भी पंजाब में उबाल ला चुके हैं अगर कमिटमेंट से ये लोग फिर से मैदान में उतरें तो कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को भागने के लिए रास्ता नहीं मिलेगा।
-डॉ. प्रमोद कुमार, डायरेक्टर,आईडीएस
पंजाब में अकाली दल से ज्यादा कांग्रेस और भाजपा को खतरा है क्योंकि दोनों ही शहरी वोटर आधारित पार्टियां हैं। पार्टी ने अभी रूरल आधारित कोई माडल नहीं दिया है। दूसरा, आप को अभी नेतृत्व निर्माण पर ज्यादा ध्यान देना। उसे एक ऐसे लीडर की जरूरत है जो पार्टी को गली मोहल्लों के संघर्ष तक ले जाए। दिल्ली में उनके पास केजरीवाल था लेकिन पंजाब में नहीं है। उन्हें अपनी पार्टी को नई राजनीति करने की योजना तैयार करनी होगी जो लोगों की जरूरतों पर आधारित हो। ग्लोबल सिटी, स्मार्ट सिटी जैसे वादों को छोड़कर बिजली पानी, सेनिटेशन, महिला सुरक्षा आदि की बात लोगों को ज्यादा पसंद आई।
साधु िसंह
लोगोंके बीच खास इमेज बनाने में नाकाम।
प्रदेश के लोग सरकार से खुश नहीं हैं और बदलाव चाहते हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी राजनीति का नया रूप लेकर आएगी। यह ईमानदारी, विश्वसनीयता और विकास की पार्टी है।
-साधुिसंह, फरीदकोट, सांसद
जीत का सेहरा पार्टी की एकजुटता का नतीजा है। अब देश के अन्य राज्यों में भी पार्टी अपना खाता खोलेगी। पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। विधानसभा चुनाव में पार्टी बढ़चढ़कर हिस्सा लेगी।
-धर्मवीरगांधी, पटियाला, सांसद
मोदी के दम पर सिर उठाने वाली भाजपा का घमंड चूर-चूर हो गया है। दिल्ली में पार्टी की सरकार बनने के बाद अब अगला निशाना पंजाब होगा। यहां जनाधार बढ़ाएंगे अौर कैंपेन चलाएंगे।
-हरइंदरखालसा, फतेहगढ़, सांसद
अब पार्टी पंजाब पर फोकस करेगी। यहां पहले से पार्टी का काफी जनाधार है। 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारियां शुरू की जाएंगी। नशा विरोधी कैंपेन जोर-शोर से चलाई जाएगी।
-भगवंतमान, संगरूर, सांसद
{पार्टी के लिए स्ट्रक्चर बनाना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
{लीडर लेस होने से सफलता को िफर से रिपीट करना अहम।
{अपने दम पर चुनाव लड़ने पर भाजपा को सोचना होगा।
{बिना सोचे समझे दूसरी पार्टी के नेताओं को भाजपा में लाने का प्रचलन थमेगा।
{आप के पैर पसारने से कांग्रेस को एंटी इंक्मबैंसी का फायदा नहीं िमलेगा।
{निराश नेता जिनमें कैप्टन, सुखपाल खैहरा कई नेता अपने पर तौल सकते हैं।
{पार्टी, सरकार में बादल परिवार का कब्जा कम होगा। नीितयां बदलनी होंगी।
{अवतार सिंह, अजीत सिंह जैसे नेताओं को पार्टी में लाकर हाशिए पर रखा है।
िजतेंद्र शंटी 46792
रामनिवास58223
अंतर11431
हरमीत िसंह 35335
अवतारिसंह 55104
अंतर17769
अवतार िहत 39318
जगदीपिसंह 65814
अंतर26496
एमएस सिरसा 44880
जरनैलिसंह 54916
अंतर10036