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4 साल का रिकॉर्ड ढूंढ़ने में चेयरपर्संस का छूटा पसीना
एल्युमनी का नहीं रिकाॅर्ड
ननु जोगिंदर सिंह | चंडीगढ़ nj.singh@dbcorp.in
नेशनलअसेस्मेंटएंड एक्रीडिएशन काउंसिल (नैक) के प्रोफॉर्मा ने पिछले कई दिन से यूनिवर्सिटी टीचर्स को परेशान किया हुआ है। जनवरी में नैक की टीम इंस्पेक्शन के लिए आने वाली है। उससे पहले भेजी जाने वाली जानकारी में नैक ने पिछले चार साल का रिकॉर्ड मांगा है, जिसे भरना पीयू के सभी चेयर पर्सनों के लिए मशक्कत भरा काम साबित हो रहा है। हालांकि ज्यादातर चेयर पर्सनों ने जैसे-तैसे इसे पूरा कर दिया है लेकिन अभी भी कई चीजें ऐसी हैं जिनका यूनिवर्सिटी के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। वर्ष 2009 से 2014 तक का रिकॉर्ड देना जरूरी है।
नैक की ओर से भेजे गए प्रोफॉर्मा में मांगा गया है कि आपने कितने नेशनल-इंटरनेशनल प्रोजेक्ट कोआॅर्डिनेट किए। आपकी फैकल्टी की जानकारी दें जिसने रिकोग्नाइज्ड और रेपुटेडेट बॉडीज के लिए टीचिंग, रिसर्च, कंसल्टेंसी या एक्सटेंशन का काम किया हो। सभी पब्लिश पेपर और इंटरनेशनल पेपर्स की परसेंटेज, फैकल्टी के नाम और उनकी पब्लिकेशन की संख्या मांगी है। ऐसे पेपर जिनकी साइटेशंस 10 से अधिक हैं। इस प्रोफॉर्मा में स्टूडेंट्स की नेट, गेट, सीआरई और सिविल सर्विसेज आदि में परफॉर्मेंस का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। ये डाटा पीयू के किसी भी डिपार्टमेंट के पास नहीं है।
नैक ने स्टूडेंट्स, एल्युमनी, पेरेंट्स, इम्प्लाॅइज और पिअर्स का रिकॉर्ड मांगा है। यूनिवर्सिटी में अब तक इसके लिए कोई सिस्टम नहीं है। इन सभी की फीड बैक के आधार पर रिकमंडेशन को कहां तक लागू किया गया। यूनिवर्सिटी में अब तक पेरेंट्स, स्टूडेंट्स से फीड बैक ही नहीं लिया जाता तो उनकी रिकंमडेशंस की संभावना ही नहीं है। रिजल्ट कितने दिन में निकाला गया और रिजर्व कैटेगरी की खाली और भरी सीटों का ब्यौरा भी मांगा गया है। एक टीचर ने बताया कि डिपार्टमेंट्स में एल्युमनी रिकॉर्ड ही नहीं है।
पीयू में अक्सर सेमिनार और वर्कशॉप होते रहते हैं, लेकिन सबका इतना पुराना रिकॉर्ड होना पॉसिबल नहीं है। वही टीचर ने बताया कि नए सिस्टम में रिकॉर्ड रखने जरूरी हैं तेा टीचर्स को पहले ही ध्यान रखना चाहिए। कहीं सेमिनार तक नहीं होते उनका रिकॉर्ड कहां से लाएं।
नए सिस्टम में डाटा रखना जरूरी